Nepal Glacial Flood: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से कई बस्तियां, सड़कें, पुल और पावर प्लांट प्रभावित हुए। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक हादसे में अब तक करीब 100 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
अचानक आई बाढ़ से मची भारी तबाही
सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का तेज बहाव आया। देखते ही देखते बाढ़ ने रसुवा के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी और बेत्रावती समेत कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
बाढ़ के तेज बहाव में पुल, सड़क और पावर प्लांट समेत कई बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। वहीं स्याफ्रुबेसी से सीमा तक करीब 16 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।
These scenes from Nepal/China border are insane! This appears to be a glacial lake outburst which is essentially identical to a HUGE dam failing.
A 50’ high wall of water destroying everything in its path! So many dead I’m afraid. Terrifying sh*t! pic.twitter.com/yfUblUR5W0
— Jesse formerly known as Darth Crypto (@DefNotDarth) August 26, 2026
1000 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 1000 से ज्यादा लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें 133 भारतीय नागरिकों के अलावा 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत की ओर जा रहे थे।
रेस्क्यू एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। हालांकि सड़क और पुल टूटने के कारण कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
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फिर आ सकती है बड़ी बाढ़
अधिकारियों ने एक और बड़े खतरे की चेतावनी दी है। जिस इलाके में ग्लेशियल झील से अचानक पानी निकलने की आशंका जताई जा रही है, वहां अभी भी करीब 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध बना हुआ है। इसके टूटने पर दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है।
इसी वजह से नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
Massice destructin #Nepal and #Tibet . Preliminary assessments point to a Glacial Lake Outburst Flood (GLOF) or a massive landslide-induced dam breach upstream in Tibet’s Gyirong county, sending millions of cubic meters of water downstream without local heavy rainfall preceding… pic.twitter.com/4Vr36Z2D4F
— VIJAY (@grovervj) August 26, 2026
बाढ़ की वजह क्या रही?
शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, ल्हेंदे नदी में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा गिरने से नदी का रास्ता रुक गया। इसके बाद पानी जमा होता गया और अचानक यह रुकावट टूट गई। जमा पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहा और फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई।
वैज्ञानिक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की संभावना की भी जांच कर रहे हैं। खास बात यह है कि बाढ़ के समय रसुवा में तेज बारिश नहीं हुई थी।
इसके अलावा सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप भी आया था। बाढ़ और भूकंप के बीच संभावित संबंध की भी जांच की जा रही है।
बिहार और UP में भी खतरा
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत में भी देखने को मिल सकता है। खासतौर पर बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी नदियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने की चेतावनी के बाद कई जिलों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है।
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है।
नेपाल का पानी त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक नदी तक पहुंच सकता है। इससे बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है।
भारत ने नेपाल को भेजी राहत सामग्री
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की ओर से नेपाल को 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाएं भेजी गई हैं।
भारत ने कहा है कि वह इस मुश्किल समय में नेपाल और उसके लोगों के साथ खड़ा है। भारत ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों और प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना भी जताई है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन दोबारा बाढ़ की आशंका के चलते प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में भी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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