Nepal Glacial Flood Update: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी। नेपाल में 157 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 3 लोगों की मौत हो गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 844 तक बताई गई है। इनमें बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की है।
बाढ़ के तेज बहाव में घर, गाड़ियां, पुल, सड़कें और बिजली परियोजनाएं बह गईं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक कम से कम 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। करीब 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है।
30 फीट तक बढ़ा पानी, 150 किमी दूर तक पहुंचा मलबा
फ्लैश फ्लड का असर रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन तक देखा गया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि लोगों, वाहनों और मलबे को नदी के साथ काफी दूर तक बहा ले गया।
चितवन में भी बाढ़ के बाद शव मिलने की सूचना सामने आई है। राहत और बचाव दल नदी के किनारे तथा मलबे में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं।
Devastating Nepal flash flood disaster
The Nepal-China Tibet border region is completely devastated, hundreds missing including tourists. #NepalFlooding pic.twitter.com/eOPPODaSt2
— Uncle Peter’s Finest (@unclepeter256) August 27, 2026
पहले भूकंप माना गया, बाद में सामने आई लैंडस्लाइड की वजह
बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआत में इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया। लेकिन बाद के विश्लेषण में US Geological Survey ने संकेत दिया कि इस घटना के पीछे भूकंप नहीं, बल्कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसकना था।
सीमा के पास पहाड़ या ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में गिरा। इससे नदी का रास्ता प्रभावित हुआ और बर्फ, चट्टान तथा मलबे का विशाल सैलाब नीचे की ओर बढ़ गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस लैंडस्लाइड से पैदा हुआ कंपन करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस हुआ।
हालांकि, वैज्ञानिक अभी इस बात की जांच कर रहे हैं कि पहाड़ या ग्लेशियर के टूटने की मूल वजह क्या थी। सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में ग्लेशियर या बड़े बर्फ-चट्टान के हिस्से के टूटने की संभावना सामने आई है।
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कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर भी संकट
बाढ़ के समय बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक इस इलाके में मौजूद थे। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार सैकड़ों यात्री लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे कई यात्रियों का संपर्क टूट गया। अलग-अलग देशों ने अपने नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए नेपाल के अधिकारियों से संपर्क किया है। दक्षिण कोरिया के हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़े कई कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं।
WARNING: DISTURBING VISUALS
Huge flash floods in Rasuwa, Nepal, tore down the Bhote Koshi from the Tibetan side.
8 to 17 dead. 384 travellers missing — 105 Indians and 37 NRIs among them. Dozens of security personnel unaccounted for.
Officials suspect a quake-triggered… pic.twitter.com/RcRDMssurz
— उदयवीर सिंह चंदेल (@UDAYBEER_) August 27, 2026
बिहार और यूपी में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा
नेपाल की नदियों में अचानक बढ़े पानी का असर भारत में भी पड़ने की आशंका है। खासतौर पर बिहार में गंडक नदी और उससे जुड़े इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। बिहार के कई जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी की गई है।
नेपाल से आने वाला पानी आगे चलकर बिहार के निचले इलाकों में दबाव बढ़ा सकता है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे जिलों में भी स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल सेना, पुलिस और स्थानीय राहत दल प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चला रहे हैं। हेलिकॉप्टरों की मदद से लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कई स्थानों पर पानी का तेज बहाव और खराब मौसम अभियान में बाधा बन रहा है।
नेपाल सरकार ने भारत और चीन से भी राहत एवं बचाव में मदद मांगी है। चीन की ओर से भी लापता लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी और लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
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