Sukesh Judge Threat Case: महाठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने जज को धमकाने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में दोषी करार दिया है। मामला वर्ष 2017 के एक भ्रष्टाचार केस से जुड़ा है, जिसमें जमानत हासिल करने के लिए सुकेश ने कथित तौर पर खुद को सुप्रीम कोर्ट का सेवारत जज बताकर विशेष जज पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। अदालत 27 अगस्त 2026 को उसकी सजा की अवधि पर सुनवाई करेगी।
पहले खुद को बताया जज का प्राइवेट सेक्रेटरी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा की अदालत ने अपने 121 पन्नों के फैसले में सुकेश की इस हरकत को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया। अदालत के मुताबिक, सुकेश ने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक सेवारत जज का प्राइवेट सेक्रेटरी बताया और बाद में खुद ही सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर विशेष जज पूनम चौधरी से बातचीत की।
सुकेश उस समय भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस हिरासत में था। आरोप है कि उसने पुलिस कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर विशेष जज के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल नंबर पर फोन किया।
गृह मंत्रालय और कॉलेजियम का दिया हवाला
फोन पर सुकेश ने जज पर उसे तत्काल जमानत देने का दबाव बनाया। उसने कथित तौर पर गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का हवाला देते हुए जज को प्रभावित करने की कोशिश की।
अदालत के अनुसार, जब जज ने उसकी बात नहीं मानी तो सुकेश ने गंभीर व्यावसायिक परिणाम भुगतने और करियर बर्बाद करने जैसी धमकियां भी दीं।
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सुप्रीम कोर्ट से संपर्क के बाद खुली पोल
फोन आने के बाद जज पूनम चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क किया। संबंधित जज के वास्तविक निजी सचिव से बातचीत के बाद पुष्टि हुई कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसा कोई फोन कॉल नहीं किया गया था।
इस तरह फर्जी जज बनकर दबाव बनाने की पूरी कोशिश सामने आ गई।
तीन धाराओं में दोषी
तीस हजारी कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की तीन धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे धारा 170 के तहत लोक सेवक का स्वांग रचने, धारा 189 के तहत लोक सेवक को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और धारा 507 के तहत गुमनाम संचार के जरिए आपराधिक धमकी देने का दोषी पाया है।
दिल्ली पुलिस की जांच पर भी कोर्ट नाराज
अदालत ने मामले की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने पुलिस की जांच को सतही और उदासीन बताया।
अदालत ने पुलिस को कांस्टेबल मनजीत की भूमिका की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। इसमें यह पता लगाने को कहा गया है कि सुकेश को मोबाइल फोन कैसे मिला, फोन का पासवर्ड किसे पता था और इस मामले की जानकारी समय रहते पुलिस को क्यों नहीं दी गई।
अब 27 अगस्त को होने वाली सुनवाई में अदालत सुकेश चंद्रशेखर को इस मामले में दी जाने वाली सजा की अवधि पर फैसला करेगी।
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