Shardiya Navratri 2026: आज यानी 18 अक्टूबर, रविवार को शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है। नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी या महाष्टमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं मां महागौरी की पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और आरती।
मां महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और दिव्य है। गौर वर्ण होने के कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है। मां के वस्त्र और आभूषण सफेद रंग के हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू सुशोभित है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं। मां महागौरी का वाहन वृषभ यानी बैल है, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी की सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मां महागौरी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके साफ और सफेद वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल पर मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- मां को सफेद फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- मां के मंत्रों का जाप करें और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।
- अंत में मां महागौरी की आरती करें और सुख-शांति की कामना करें।
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मां महागौरी को लगाएं नारियल का भोग
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां को खीर, सफेद मिठाई, दूध से बनी मिठाइयां और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। अष्टमी पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु हलवा, पूरी और चने का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगा सकते हैं।
मां महागौरी का विशेष मंत्र
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
मां महागौरी का ध्यान मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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मां महागौरी की आरती |
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जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥ |
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हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा॥ |
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चंद्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे॥ |
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भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता॥ |
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हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥ |
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सती सत हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥ |
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बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥ |
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तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया॥ |
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शनिवार को तेरी पूजा जो करता। मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥ |
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भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी मां तेरी सदा ही जय हो॥ |
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जय मां महागौरी। जय मां दुर्गा। |
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