Amazon Ram Mandir Prasad Controversy: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन पर राम मंदिर का प्रसाद बताकर सामान्य मिठाइयां बेचने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने अमेजन पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। कंपनी को यह रकम 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। नोटिस मिलने के बाद अमेजन ने विवादित प्रोडक्ट की लिस्टिंग अपने प्लेटफॉर्म से हटा दी।
CCPA ने अपने आदेश में कहा कि किसी सामान्य मिठाई को राम मंदिर का प्रसाद बताकर बेचना करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। प्राधिकरण ने इसे उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला मामला माना है।
चार तरह की मिठाइयों को बताया गया था राम मंदिर का प्रसाद
अमेजन पर घी के लड्डू, खोया के लड्डू, बूंदी के लड्डू और गाय के दूध से बने पेड़े बेचे जा रहे थे। इन उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग में इन्हें ‘राम मंदिर प्रसाद’ बताया गया था।
आरोप है कि इन मिठाइयों को राम मंदिर का प्रसाद बताने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। प्रोडक्ट की लिस्टिंग में धार्मिक तस्वीरों और प्रतीकों का भी इस्तेमाल किया गया था।
‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर का आशीर्वाद’ होने का दावा
मामला जनवरी 2024 में सामने आया था। चंदू ट्रेडिंग कंपनी ने ‘बिहार ब्रदर्स’ ब्रांड के नाम से अमेजन पर चार तरह की मिठाइयां लिस्ट की थीं।
इन प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग में धार्मिक तस्वीरों के साथ दावा किया गया था कि मिठाइयों पर ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या का आशीर्वाद’ है। वहीं प्रोडक्ट के विवरण में इन्हें ‘राम मंदिर प्रसाद’ के तौर पर पेश किया गया था।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले हुई थी लिस्टिंग
CCPA के मुताबिक, इन मिठाइयों की लिस्टिंग 22 जनवरी 2024 को हुई राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से कुछ समय पहले की गई थी। मामले में 19 जनवरी को शो-कॉज नोटिस जारी होने के बाद अमेजन ने संबंधित लिस्टिंग हटा दी थी।
इस मामले की शिकायत कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने जनवरी 2024 में की थी।

अमेजन ने कहा- हम सिर्फ ऑनलाइन मार्केटप्लेस
मामले में अमेजन ने अपने बचाव में कहा कि वह केवल एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस है। कंपनी के मुताबिक, विक्रेता खुद प्रोडक्ट की लिस्टिंग करता है, उसकी कीमत और विवरण तय करता है और बिक्री करता है।
अमेजन ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण का भी हवाला दिया। हालांकि, CCPA ने इस दलील को खारिज कर दिया।
प्राधिकरण ने कहा कि IT एक्ट और उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 अलग-अलग कानूनी जिम्मेदारियां तय करते हैं। कोई मार्केटप्लेस सिर्फ मध्यस्थ होने का दावा करके उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता, खासकर जब वह अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेनदेन से व्यावसायिक लाभ कमा रहा हो।
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चारों प्रोडक्ट से हुई थी ₹39,802 की बिक्री
अमेजन ने CCPA को बताया कि विवादित चारों प्रोडक्ट की लिस्टिंग से कुल ₹39,802 की बिक्री हुई थी। इसमें अमेजन को करीब ₹15,165 सर्विस फीस के रूप में मिले।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले सामने आया ₹25.26 लाख का बिक्री आंकड़ा इन चार प्रोडक्ट का नहीं था। यह संबंधित विक्रेता की सभी लिस्टिंग से हुई कुल ग्रॉस मर्चेंडाइज सेल थी।
अब धार्मिक प्रसाद बेचने से पहले लेनी होगी अनुमति
CCPA ने अमेजन को निर्देश दिया है कि ‘प्रसाद’, ‘प्रसादम’, ‘महाप्रसाद’, ‘भोग’ या इसी तरह के धार्मिक नाम से कोई प्रोडक्ट तभी लिस्ट किया जाए, जब संबंधित धार्मिक संस्था की अनुमति का प्रमाणपत्र उपलब्ध हो।
यह निर्देश राम जन्मभूमि मंदिर, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम, माता वैष्णो देवी श्राइन, काशी विश्वनाथ मंदिर और जगन्नाथ मंदिर समेत 10 धार्मिक संस्थानों से जुड़े उत्पादों पर लागू होगा।
इसके अलावा अमेजन को विक्रेता और उसके ग्रीवांस ऑफिसर की पूरी जानकारी प्रमुखता से दिखाने का निर्देश भी दिया गया है।
धार्मिक नाम वाले प्रोडक्ट पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश
प्राधिकरण ने अमेजन से धार्मिक नामों वाले उत्पादों की पहचान के लिए कीवर्ड आधारित निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। ऐसे प्रोडक्ट सामने आने पर उन्हें तत्काल हटाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
CCPA ने अमेजन के बाद में किए गए सहयोग को राहत देने वाला कारक माना है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की गलती दोहराए जाने पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
स्वामी राजकुमार दास ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
श्रीराम मंदिर धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास ने मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अमेजन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई कंपनी या संस्था भक्तों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।
उन्होंने कहा कि वह अभी अयोध्या से बाहर हैं। अयोध्या लौटने के बाद धार्मिक समिति के सदस्यों और राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के सामने यह मामला रखेंगे और कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
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