Gujarat Poisonous Liquor Case: गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब कांड ने शराबबंदी वाले राज्य में अवैध शराब के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि घर में जहरीली शराब तैयार की जाती थी और बाद में उसे लोकप्रिय IMFL ब्रांड के लेबल लगी बोतलों में भरकर सप्लाई किया जाता था। इस मामले में अब तक 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने गुजरात के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
67 लोगों ने पी थी जहरीली शराब
अधिकारियों के अनुसार, कुल 67 लोगों ने यह शराब पी थी। शराब में अत्यंत जहरीला रसायन मेथनॉल मिला हुआ था। कई लोगों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच में शराब के नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल और 0.94 प्रतिशत एथनॉल पाया गया। पुलिस ने जांच के दौरान जहरीले रसायन वाली शराब की बोतलें भी जब्त की हैं।
13 और आरोपियों की गिरफ्तारी से संख्या 27 हुई
पुलिस ने पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद 13 और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है।
STORY | Gujarat hooch tragedy: 13 more arrested; 27 held so far
Gujarat Police have arrested 13 more persons in connection with the hooch tragedy in Bhavnagar, including a man from Madhya Pradesh who played a major role in the manufacture of the spurious liquor that claimed 13… pic.twitter.com/TQt1mLYCZX
— Press Trust of India (@PTI_News) August 25, 2026
गिरफ्तार किए गए ज्यादातर आरोपी भावनगर के रहने वाले हैं। इनमें मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले का रहने वाला आनंद छांदी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, उसे कथित तौर पर नकली शराब तैयार करने के लिए उज्जैन से भावनगर लाया गया था।
जांच में उसकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि उसने शराब तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की खरीद में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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भावनगर के घर में तैयार होती थी जहरीली शराब
पुलिस के अनुसार, जहरीली शराब कथित तौर पर उज्जैन से पकड़े गए रईस की मदद से भावनगर के वरतेज निवासी गौतम सोलंकी के घर पर तैयार की गई थी।
शराब तैयार करने के बाद उसे IMFL ब्रांड के लेबल लगी बोतलों में भरा और सील किया जाता था। इसके बाद इन बोतलों को अवैध शराब विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था।
इससे यह भी पता चलता है कि आरोपियों ने नकली शराब को असली ब्रांड की शराब जैसा दिखाने की कोशिश की थी।
16 अगस्त की रात सामने आया था मामला
यह मामला 16 अगस्त की रात सामने आया था। वरतेज इलाके में तीन दोस्तों ने शराब पी थी। इसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनमें से एक की मौत हो गई।
मृतक उपेंद्रसिंह गोहिल के खून के नमूने की जांच में मेथनॉल पाया गया। इसके बाद पुलिस को जहरीली शराब की आशंका हुई। धीरे-धीरे इस शराब को पीने वाले अन्य लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों की जानकारी सामने आती गई।
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पांच राज्यों में जांच कर रही 16 टीमें
मामले की तह तक पहुंचने के लिए राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) की 16 टीमें जांच में जुटी हैं। ये टीमें गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सबूत जुटा रही हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जहरीली शराब में इस्तेमाल किया गया मेथनॉल और अन्य रसायन कहां से खरीदे गए थे। इसके अलावा रसायनों को भावनगर तक पहुंचाने वाले ट्रांसपोर्टरों और कच्चे माल की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अब NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान
मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेकर गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला माना है।
NHRC ने गुजरात के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मांगा जवाब
आयोग ने केवल घटना और अब तक की कार्रवाई की जानकारी ही नहीं मांगी है, बल्कि यह भी पूछा है कि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपाय क्या किए जा रहे हैं।
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां अवैध शराब के पूरे नेटवर्क, रसायनों की सप्लाई और आरोपियों से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।
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