Nepal Glacial Flood Update: नेपाल-चीन सीमा पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और बड़े फ्लैश फ्लड का खतरा पैदा हो गया है। नेपाल और चीन ने हिमालयी क्षेत्र में नई बनी झीलों को लेकर अलर्ट जारी किया है। एक झील नदी में मलबा जमा होने से बनी है और उसके तेजी से भरने की वजह से उसके टूटने का खतरा बढ़ गया है। अगर पानी अचानक नीचे की ओर बहता है तो भोटेकोशी नदी के आसपास के इलाकों में फिर विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
बॉर्डर से 18 किमी ऊपर बनी झील
चीन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, रसुवागढ़ी बॉर्डर से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंदे नदी में पानी का बहाव मलबे के कारण रुक गया है। इससे वहां एक झील जैसी स्थिति बन गई है। पानी लगातार जमा होने के कारण इसके टूटने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल के अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव दलों को नदी के किनारे और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।
चीन ने भी चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में बड़ी मात्रा में पानी इस झील में जमा हो सकता है, जिससे बांध टूटने का खतरा बढ़ सकता है। इससे नीचे की ओर अचानक बाढ़ आ सकती है।
362 लोगों की मौत, 1,468 लोग लापता
बुधवार को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 362 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल और तिब्बत में बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं।
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार नेपाल में करीब 910 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में करीब 1,468 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान जारी रहने के साथ संख्या बदल सकती है।
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ग्लेशियर टूटने और लैंडस्लाइड से आई तबाही
इस आपदा की शुरुआत हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने से हुई। इसके बाद बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे का भारी प्रवाह नदी में पहुंचा और पानी का स्तर अचानक बढ़ गया।
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी का तेज बहाव आया, जिसने सड़कें, पुल, घर और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।
शुरुआत में सीमा क्षेत्र में महसूस हुए तेज झटकों को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद की जांच में लैंडस्लाइड और ग्लेशियर टूटने को आपदा का प्रमुख कारण माना गया।
राहत और बचाव अभियान जारी
मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियां बचाव अभियान चला रही हैं। कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने के कारण बचाव दलों को हेलिकॉप्टर और पैदल मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की सूचना है। एपी के मुताबिक नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है, जबकि तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता हैं।
अब नई झील ने बढ़ाई चिंता
पहली आपदा से उबरने की कोशिश कर रहे नेपाल के सामने अब दूसरी संभावित बाढ़ की चुनौती है। नदी में बने प्राकृतिक अवरोध के पीछे जमा पानी अगर अचानक बाहर निकलता है तो भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
इसी वजह से प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। लगातार बारिश होने पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
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