Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब पूरा फोकस एक लापता अमेरिकी पायलट पर आ गया है। हालिया घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी लड़ाकू विमान मार गिराए हैं, जिसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इस घटना में एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अब भी ईरान के अंदर लापता है।
एक पायलट सुरक्षित, दूसरा दुश्मन इलाके में फंसा
गिराए गए F-15E Strike Eagle (जिसे लेकर F-35 Lightning II होने की भी चर्चा है) में सवार दो पायलटों में से एक को अमेरिकी सेना ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है। लेकिन दूसरा पायलट अभी भी ईरान के भीतर फंसा हुआ है, जिससे चिंता बढ़ गई है।
सर्च ऑपरेशन में जुटी अमेरिकी सेना
लापता पायलट को खोजने के लिए अमेरिकी सेना ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। स्पेशल फोर्सेज, एयर सपोर्ट और सर्विलांस सिस्टम लगातार एक्टिव हैं। दुश्मन इलाके में ऑपरेशन चलाना बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है, लेकिन पायलट को सुरक्षित निकालना अमेरिका की प्राथमिकता बन चुका है।
रेस्क्यू मिशन भी बना निशाना
पायलट को बचाने के लिए भेजे गए दो UH-60 Black Hawk हेलिकॉप्टरों पर भी हमला किया गया। हालांकि, हमले के बावजूद दोनों हेलिकॉप्टरों में सवार सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि रेस्क्यू मिशन कितना खतरनाक हो चुका है।
इनाम का ऐलान, बढ़ा खतरा
ईरान ने लापता अमेरिकी पायलट को जिंदा पकड़ने पर करीब ₹55 लाख का इनाम घोषित किया है। सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने आम नागरिकों से अपील की है कि पायलट को पकड़कर सरकार या सेना को सौंपा जाए। इस ऐलान के बाद पायलट की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है।
दूसरा पायलट कुवैत में सुरक्षित
इस पूरे घटनाक्रम के बीच A-10 थंडरबोल्ट II विमान (जिसे “वार्थोग” भी कहा जाता है) का पायलट कुवैत के हवाई क्षेत्र तक पहुंचने में कामयाब रहा और इजेक्ट कर सुरक्षित बच गया। हालांकि, लापता पायलट को लेकर स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
हम युद्ध में हैं– ट्रंप
इस मामले पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “हम युद्ध में हैं”, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से बातचीत की प्रक्रिया पर असर नहीं पड़ेगा।
क्या बढ़ेगा टकराव?
एक अमेरिकी पायलट का दुश्मन इलाके में फंसा होना इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील पहलू बन चुका है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपने पायलट को सुरक्षित निकाल पाएगा, या यह घटना दोनों देशों के बीच बड़े सैन्य टकराव का कारण बनेगी। दुनिया की नजर अब इसी पर टिकी हुई है।






