India-Iran Oil Deal: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव के बीच भारत ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए करीब 7 साल बाद ईरान से कच्चे तेल की खरीद फिर शुरू कर दी है। शिपिंग ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक “जया” नाम का तेल टैंकर ईरानी क्रूड लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके इसी सप्ताह भारतीय पूर्वी तट पर पहुंचने की संभावना है। यह 2019 के बाद पहली बार होगा जब भारत को ईरान से आधिकारिक रूप से कच्चे तेल की खेप मिलेगी।
चीन जा रहा टैंकर भारत की ओर लौटा
इस टैंकर में करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लदा हुआ है। शुरुआत में जहाज भारत के गुजरात स्थित वाडिनार पोर्ट की ओर बढ़ रहा था, लेकिन बीच में इसका रूट बदल गया और यह चीन की दिशा में जाता दिखाई दिया। उस समय अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि भुगतान संबंधी दिक्कतों की वजह से जहाज का रुख बदला गया है। हालांकि भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया था। अब जहाज दोबारा भारत की ओर लौट चुका है और फिलहाल मलेशिया के आसपास समुद्री मार्ग पर है।
7 साल बाद क्यों बदली भारत की नीति?
भारत ने मई 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था। उस समय अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस की चेतावनी दी थी, जिसके बाद भारत सहित कई देशों ने ईरानी तेल खरीदना रोक दिया था।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अमेरिका-इजराइल-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फिर ईरान की ओर रुख कर रहा है।
रूस से भी रिकॉर्ड स्तर पर खरीद
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने रूस से भी तेल खरीद बढ़ा दी है। बाजार डेटा के अनुसार संघर्ष बढ़ने के बाद भारत ने एक ही सप्ताह में लगभग 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीदा। 24 मार्च तक रूस से भारत का आयात करीब 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जबकि फरवरी में यह लगभग 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।
तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
मध्य पूर्व संकट का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत फरवरी 2026 में करीब 69 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कीमतों में यह उछाल भारत के आयात बिल और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है।
होर्मुज में फंसे भारतीय जहाज
रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल 17 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित रास्ते का इंतजार कर रहे हैं, जबकि 7 जहाज हाल ही में वहां से निकलने में सफल हुए हैं। यह स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा तेल आयात इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होता है।
LPG सप्लाई भी हो रही
ईरान से सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि LPG की आपूर्ति भी भारत पहुंच रही है। करीब 44,000 मीट्रिक टन LPG लेकर एक जहाज 2 अप्रैल को मैंगलोर पोर्ट पहुंचा, जहां फिलहाल ईंधन उतारने की प्रक्रिया जारी है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान से तेल खरीद दोबारा शुरू करना भारत के लिए सिर्फ ऊर्जा आयात का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक संतुलन का संकेत भी है। इससे भारत एक तरफ अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक अस्थिरता के बीच सप्लाई के वैकल्पिक स्रोत मजबूत कर रहा है।
आने वाले दिनों में अगर मध्य पूर्व का तनाव और बढ़ता है, तो भारत की यह रणनीति उसके ऊर्जा सुरक्षा ढांचे के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।






