Harivansh Comeback: राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) की एक बार फिर उच्च सदन में वापसी हो गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य नियुक्त किया, जिसके बाद उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन (C. P. Radhakrishnan) ने उन्हें शपथ दिलाई। हरिवंश की यह वापसी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब उनके दोबारा राज्यसभा के उपसभापति बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
कब खत्म हुआ था हरिवंश का पिछला कार्यकाल?
हरिवंश नारायण सिंह का पिछला राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। वे बिहार से JDU के राज्यसभा सांसद थे और पार्टी के कोटे से सदन में पहुंचे थे। हालांकि इस बार JDU ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद माना जा रहा था कि उनकी संसदीय पारी फिलहाल समाप्त हो सकती है।
फिर कैसे हुई राज्यसभा में वापसी?
हरिवंश की वापसी राष्ट्रपति के मनोनीत कोटे के जरिए हुई है। दरअसल, राज्यसभा में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक मनोनीत सीट खाली हुई थी। इसी सीट पर राष्ट्रपति ने हरिवंश नारायण सिंह को नामित किया। अब वे 2032 तक राज्यसभा सदस्य रहेंगे।

क्या दोबारा बन सकते हैं उपसभापति?
संविधान के अनुच्छेद 89 के अनुसार राज्यसभा का कोई भी सदस्य चाहे निर्वाचित हो या मनोनीत उपसभापति चुना जा सकता है। इसलिए हरिवंश के लिए दोबारा उपसभापति बनने का रास्ता पूरी तरह खुला है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो वे एक बार फिर इस पद की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
पहले भी रह चुके हैं राज्यसभा के उपसभापति
हरिवंश पहली बार 2018 में राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे। इसके बाद 2020 में दोबारा इस पद पर निर्वाचित हुए। उन्होंने 2018 से 2024 तक इस भूमिका में कार्य किया और सदन संचालन में उनकी कार्यशैली को काफी सराहा गया।
पीएम मोदी ने पहले ही दे दिया था संकेत
18 मार्च 2026 को राज्यसभा के विदाई समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के लिए कहा था कि उनकी सार्वजनिक भूमिका अभी समाप्त नहीं हुई है और वे आगे भी जनहित में योगदान देंगे। पीएम के इस बयान को उसी समय हरिवंश की वापसी के संकेत के रूप में देखा गया था।
नीतीश कुमार से दूरी की चर्चाओं के बीच वापसी
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि हाल के समय में हरिवंश और नीतीश कुमार के रिश्तों में कुछ दूरी देखी गई थी। JDU द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद इन अटकलों को और बल मिला, लेकिन राष्ट्रपति के मनोनयन के जरिए उनकी वापसी ने यह साफ कर दिया कि NDA नेतृत्व अब भी उन पर भरोसा जता रहा है।
पत्रकारिता से संसद तक का सफर
हरिवंश नारायण सिंह राजनीति में आने से पहले एक वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश ने बिहार से JDU का प्रतिनिधित्व किया और अपनी शांत लेकिन प्रभावी कार्यशैली के कारण संसद में अलग पहचान बनाई।






