Ballia Inspector Viral Audio: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां कानून के रखवाले पर ही पीड़िता के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगा है। एक इंस्पेक्टर पर आरोप है कि उसने चार्जशीट दाखिल करने के नाम पर महिला से अशोभनीय बातचीत की और उसे अकेले मिलने के लिए दबाव बनाया। इस पूरे मामले का ऑडियो बुधवार को सामने आया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
“कब मिलोगी… कहां रुकोगी…”
वायरल ऑडियो में इंस्पेक्टर क्राइम महिला से कहता सुनाई देता है-
“कब मिलोगी बताओ… कहां रुकने का विचार है… जितने पैसे लगेंगे दे दूंगा… मैं तुम्हारी चार्जशीट दो सेकेंड में, एक फोन पर फाइनल कर दूंगा… मैं इंस्पेक्टर क्राइम बाबू हूं…”
महिला के इनकार करने के बावजूद इंस्पेक्टर लगातार दबाव बनाता रहा और अपने पद का हवाला देकर काम जल्दी कराने की बात करता रहा। यह बातचीत पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिकायत के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई
पीड़िता ने सोमवार को पूरे मामले की शिकायत आजमगढ़ रेंज के डीआईजी सुनील कुमार सिंह से की थी। शिकायत के साथ ही जब कथित ऑडियो सामने आया, तो अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर और प्रथम दृष्टया सही मानते हुए इंस्पेक्टर (क्राइम) नरेश मलिक को निलंबित कर दिया गया। वहीं, मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में उभांव थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) संजय शुक्ला पर भी गाज गिरी और उन्हें भी सस्पेंड कर दिया गया। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे सीओ रसड़ा को सौंपा गया है, जिन्हें आगे की कार्रवाई तय करने और विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप
दरअसल यह पूरा मामला पहले से दर्ज एक गंभीर शिकायत से जुड़ा हुआ है। बलिया के रसड़ा थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने वन दरोगा उग्रसेन कुमार पर आरोप लगाया था कि उसने शादी का झांसा देकर करीब 8 महीने तक उसका यौन शोषण किया। विरोध करने पर आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़िता ने 3 फरवरी को उभांव थाने में तहरीर दी थी, लेकिन थाना स्तर पर तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर उसने उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई, जिसके बाद 17 दिन की देरी से आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने आरोपी पर हल्की धाराएं लगाईं, जिसके चलते उसे महज दो दिन में ही जमानत मिल गई। इस पर पहले से ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे, और अब इंस्पेक्टर पर लगे नए आरोपों ने पूरे सिस्टम की साख पर और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
चार्जशीट के नाम पर सौदेबाजी का आरोप
पीड़िता का कहना है कि जब केस की चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान विवेचक इंस्पेक्टर (क्राइम) नरेश मलिक ने उससे आपत्तिजनक बातें कीं। उसे अकेले मिलने के लिए बुलाया गया और चार्जशीट जल्दी फाइनल कराने के नाम पर दबाव बनाया गया। इससे आहत होकर पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की।
पुलिस ने क्या कहा
जिला पुलिस प्रमुख ने कहा कि इंस्पेक्टर द्वारा की गई बातचीत उनके कर्तव्यों के विपरीत और अशोभनीय पाई गई है। इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, सीओ को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़िता से बातचीत कर आगे की निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यूपी पुलिस पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की करतूत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है जहां पीड़ित को न्याय दिलाने की प्रक्रिया ही उसके लिए एक और संघर्ष बन जाती है।
अब देखना होगा कि क्या इस मामले में सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रहा जाएगा या दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।






