Global Network Cable: अरब सागर और होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर इन दिनों यह चर्चा तेज है कि क्या वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क की केबल को नुकसान पहुंचाया गया है। भारत समेत पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होती दिख रही हैं। आम लोगों के मोबाइल में इंटरनेट दिन में कई बार बंद हो रहा है, जिससे यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि समस्या टेलीकॉम कंपनियों की है या कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय कारण इसके पीछे है।
दुनिया आज ग्लोबल इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ी हुई है, जिसके लिए समुद्र के भीतर फाइबर केबल्स का विशाल जाल बिछाया गया है। Google, Microsoft और Yahoo जैसी कंपनियों ने इन केबल्स के जरिए अपने डेटा सेंटर्स को आपस में जोड़ा हुआ है, जो आगे मोबाइल सेवा प्रदाताओं को इंटरनेट उपलब्ध कराते हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच हूती विद्रोहियों ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर इजरायल-हमास युद्ध जारी रहा तो वे अरब सागर क्षेत्र में गुजरने वाली ग्लोबल नेटवर्क केबल्स को निशाना बना सकते हैं। वहीं ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव बढ़ने की स्थिति में समुद्री नेटवर्क को प्रभावित किया जा सकता है।
ब्लू-रमन केबल कटे तो क्या होगा असर?
अगर ब्लू-रमन सबमरीन केबल, जो मुंबई के पास अरब सागर में लैंड करती है, क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो भारत पर इसका असर दिख सकता है। हालांकि इंटरनेट पूरी तरह ठप नहीं होगा।
1. भारत पर तुरंत असर
गूगल क्लाउड (मुंबई/दिल्ली): 40–60% तक स्लो हो सकता है, क्योंकि यूरोप-US ट्रैफिक इसी रूट से गुजरता है।
Youtube, Gmail, Meet: पीक आवर्स में बफरिंग बढ़ेगी, लेटेंसी 200–300ms तक जा सकती है।
AI सर्विस (Gemini आदि): जवाब देने में देरी, क्योंकि डेटा US-यूरोप से आता है।
UPI, डिजिलॉकर: इन पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये घरेलू सर्वरों पर चलते हैं।
2. Microsoft और AWS पर असर
माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेस अपने अलग नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन केबल शेयरिंग के कारण हल्का असर संभव है। पूरी तरह सेवाएं बंद नहीं होंगी, लेकिन शाम 6–11 बजे इंटरनेट “भारी” महसूस हो सकता है। वीडियो लो क्वालिटी (144p), फाइल अपलोड स्लो।
3. ट्रैफिक शिफ्ट
कंपनियां बैकअप रूट (जैसे दूसरी सबमरीन केबल या सैटेलाइट) पर ट्रैफिक शिफ्ट करती हैं। यह महंगा और जटिल होता है, जिसमें 24–48 घंटे तक का समय लग सकता है। तब तक स्पीड धीमी रहती है।
मरम्मत में कितना समय लगेगा?
अरब सागर में केबल रिपेयर अपेक्षाकृत आसान है:
- गहराई: 100–500 मीटर (रेड सी के 2–3 किमी के मुकाबले कम)
- खतरा: क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित, भारतीय एजेंसियों की निगरानी
- रिपेयर टाइम: लगभग 7–15 दिन
केबल रिपेयर शिप (जैसे “CS Responder”) 48 घंटे में मौके पर पहुंच सकती है, जिससे मरम्मत तेज होती है। इसके मुकाबले रेड सी जैसे इलाकों में युद्ध और गहराई के कारण 2–3 महीने तक लग सकते हैं।
लंबी अवधि का प्लान
इसी जोखिम को देखते हुए Google 2Africa Pearls और Africa-1 जैसी नई केबल परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जो रेड सी को बायपास कर अफ्रीका के रास्ते भारत को जोड़ेंगी। 2027 के बाद ऐसे वैकल्पिक रूट तैयार होने से किसी एक केबल के कटने का असर काफी कम हो जाएगा।
बता दें कि अगर ब्लू-रमन सबमरीन केबल अरब सागर में कटती है, तो भारत का इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन 1–2 हफ्तों तक यूट्यूब, क्लाउड और इंटरनेशनल सेवाएं स्लो चल सकती हैं। फिलहाल केबल कटने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के चलते आशंकाएं जरूर बढ़ गई हैं।






