Assembly Elections 2026: चुनाव आयोग ने आगामी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले EVM में छेड़छाड़ को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। EVM बटन पर गोंद, स्याही या परफ्यूम के इस्तेमाल को गंभीर अपराध मानते हुए तुरंत कार्रवाई और री-पोलिंग के आदेश दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पार्टियां खासतौर पर बीजेपी और ममता बनर्जी की त्रिमणुल कांग्रेस प्रतिस्पर्धा में हैं । वोटिंग से पहले ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केन्द्र पर कई गंभीर आरोप पहले ही लगा दिए हैं ।
पश्चिम बंगाल चुनावों में हिंसा को लेकर पहले ही चुनाव आयोग सतर्क है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को भी केन्द्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए हमला किया है । बंगाल चुनावों में सुरक्षा को लेकर पहले ही केन्द्रीय अर्धसैनिक बल चुनावो में सुरक्षा के लिए तैनात किए जा चुके हैं।
सुरक्षित और पारदर्शि चुनावों को लेकर चुनाव आयोग पहले ही सतर्क है जिसने कई निर्देश जारी किए हैं । वहीं EVM को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर देश की शिर्ष अदालत पहले ही क्लीन चिट दे चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला – अप्रैल 2024
VVPAT 100% मिलान वाली याचिका खारिज करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा:“EVM से छेड़छाड़ के बारे में संदेह निराधार हैं। नतीजों को बेहतर बनाने के लिए फर्मवेयर हैक करना संभव नहीं है। बैलेट पेपर पर वापसी से चुनावी सुधार खत्म हो जाएंगे।”
कोर्ट के 2 निर्देश
- सिंबल लोडिंग यूनिट 45 दिन स्टोर होंगी
- रिजल्ट के बाद दूसरे नंबर के उम्मीदवार के कहने पर 5% EVM की जांच होगी।
EVM क्यों सुरक्षित मानी गई
वन टाइम प्रोग्रामेबल चिप: EVM इंटरनेट, ब्लूटूथ, वाई-फाई से नहीं जुड़ती।
स्टैंडअलोन मशीन: कंप्यूटर नेटवर्क से अलग काम करती है।
मॉक पोल: मतदान से पहले उम्मीदवारों के सामने 1000+ वोट डालकर चेक होता है।
VVPAT मिलान: अब तक 118 करोड़ वोटों में सिर्फ 25 शिकायत, वो भी फर्जी निकलीं।








