Iran-US Talks Collapse: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद दौरे के बाद बिना किसी अमेरिकी प्रतिनिधि से मुलाकात किए वापस लौट गए। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान-अमेरिका तनाव पर चर्चा हुई, लेकिन किसी ठोस नतीजे तक बात नहीं पहुंच सकी।
पाकिस्तान के जरिए ईरान ने रखीं अपनी बात
अराघची ने पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में इस्तेमाल करते हुए ईरान की शर्तें और अमेरिकी मांगों पर अपनी आपत्तियां साझा कीं। ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका से सीधे बातचीत नहीं करेगा और अपनी स्थिति पाकिस्तान जैसे माध्यमों के जरिए ही आगे बढ़ाएगा।
Very fruitful visit to Pakistan, whose good offices and brotherly efforts to bring back peace to our region we very much value.
Shared Iran’s position concerning workable framework to permanently end the war on Iran. Have yet to see if the U.S. is truly serious about diplomacy.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 25, 2026
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी संकेत दिया कि मौजूदा हालात में संवाद की प्रक्रिया अप्रत्यक्ष रूप से ही जारी रहेगी।
ट्रंप का बड़ा फैसला, दूतों का दौरा रद्द
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया। ये दोनों अधिकारी ईरान से संभावित बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाने वाले थे। ट्रंप ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“इस पूरे मामले में हमारा समय बर्बाद हो रहा था। इतनी लंबी यात्रा की कोई जरूरत नहीं थी। ईरान के भीतर नेतृत्व को लेकर भ्रम और आंतरिक खींचतान है। अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो वह सीधे अमेरिका से संपर्क कर सकता है। अमेरिका मजबूत स्थिति में है और हमारे पास सभी विकल्प मौजूद हैं।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका अब ऐसे किसी भी कूटनीतिक प्रयास में शामिल नहीं होगा, जिसका कोई ठोस परिणाम सामने न आए।
पहले दौर की बातचीत क्यों नहीं बन सकी सहमति?
पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच पहले भी करीब 21 घंटे लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन वह असफल रही। मुख्य विवाद होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर था।
अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे और समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़कर देखता है।
ईरान का बयान: पाकिस्तान की भूमिका अहम
अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद दौरे को उपयोगी बताया और कहा कि क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने एक ऐसा फ्रेमवर्क साझा किया है, जो लंबे समय तक क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद कर सकता है।
बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। एक तरफ पाकिस्तान के जरिए अप्रत्यक्ष कूटनीति जारी है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अपने दूतों का दौरा रद्द कर सख्त रुख अपना लिया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।






