भारत और कई देशों के बीच उर्वरक आपूर्ति में वैश्विक अस्थिरता के चलते दबाव बढ़ा है। खासकर मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे भारत वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की ओर बढ़ रहा है।
इंडियन पोटाश लिमिटेड ने वर्ष 2025 के लिए लगभग 25 लाख टन यूरिया की खरीद के समझौतों की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि यह आंकड़ा भारत की कुल आयात जरूरत का बड़ा हिस्सा नहीं बल्कि सीमित हिस्सा है, क्योंकि भारत हर साल लगभग 7 से 10 मिलियन टन (70–100 लाख टन) यूरिया का आयात करता है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ता और आयातक देशों में शामिल है। देश का घरेलू उत्पादन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस पर आधारित है, जिसकी बड़ी मात्रा मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों से आयात की जाती है।
उद्योग विशेषज्ञों और रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुमान के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत की यूरिया मांग में वृद्धि के चलते आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है और 2030 तक यह लगभग 25–30% तक पहुंच सकती है।
वैश्विक आपूर्ति दबाव, चीन द्वारा समय-समय पर निर्यात प्रतिबंध और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत रूस, बेलारूस और मोरक्को जैसे देशों से उर्वरक आयात को विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि कृषि क्षेत्र को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।






