CAA NRC Bangladesh Tension: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर बांग्लादेश में चिंता बढ़ती नजर आ रही है। ढाका में संसद सत्र के दौरान दिए गए एक बयान में कहा गया कि अगर राज्य में BJP की सरकार बनती है, तो माइग्रेशन और नागरिकता से जुड़े मुद्दों खासकर NRC और CAA पर सख्ती बढ़ सकती है। इसे सिर्फ पश्चिम बंगाल का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बताया गया है।
बांग्लादेश की नजर इस चुनाव पर इसलिए भी है क्योंकि भारत-बांग्लादेश के बीच 4,096 किमी लंबी साझा सीमा है, जो भारत की किसी भी देश के साथ सबसे लंबी सीमा है। दशकों से इस सीमा के जरिए अनौपचारिक आवाजाही होती रही है, जिससे माइग्रेशन का मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है।
NRC और CAA को लेकर ढाका की चिंता पहले से ही रही है। असम में 2019 में NRC लागू होने के बाद करीब 19 लाख लोग सूची से बाहर हो गए थे। वहीं CAA 2019 के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है। बांग्लादेश को आशंका है कि उसे “अवैध प्रवासियों” का स्रोत माना जा सकता है। पश्चिम बंगाल में करीब 30% मुस्लिम आबादी और BJP द्वारा “घुसपैठ” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाए जाने से यह चिंता और बढ़ गई है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, पानी और सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। तीस्ता जल बंटवारा, बॉर्डर हाट और ट्रांजिट रूट जैसे विषय राज्य, केंद्र और ढाका के तालमेल पर निर्भर करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव होता है और NRC जैसे कदम उठाए जाते हैं, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में खिंचाव आ सकता है।
भारत में BJP नेताओं ने बांग्लादेशी बयान को “आंतरिक मामलों में दखल” बताया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि ममता बनर्जी पहले ही NRC और CAA का विरोध कर चुकी हैं। बांग्लादेश की सत्ताधारी अवामी लीग ने भी इस बयान का समर्थन नहीं किया है, जबकि विपक्षी BNP ने इसे “सीमा के दोनों ओर बंगाली पहचान” से जुड़ी चिंता बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका के सांसद का भारतीय राज्य चुनाव पर इस तरह बयान देना असामान्य है, क्योंकि विदेश नीति आमतौर पर प्रधानमंत्री या विदेश मंत्रालय के स्तर पर तय होती है। यह संकेत है कि NRC और CAA जैसे मुद्दे अब भी सक्रिय हैं और उनका असर सीमापार राजनीति पर भी पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अब सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि एक संभावित भू-राजनीतिक घटना बनता दिख रहा है। अगर BJP सत्ता में आती है और NRC लागू करने की दिशा में कदम बढ़ते हैं, तो बांग्लादेश को निर्वासन दबाव, व्यापार, जल बंटवारे और सीमा प्रबंधन पर असर की आशंका है। वहीं TMC के सत्ता में बने रहने पर मौजूदा स्थिति जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।






