तमिलनाडु में थलापति विजय का गेम सेट? 5 विधायक पक्के, बाकी के लिए जोड़-तोड़ का खेल शुरू

Thalapathy Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे बड़ा नाम थलापति विजय का है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत है। विजय दो सीटों से जीते हैं, इसलिए एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी के पास 107 विधायक ही बचेंगे। यानी सत्ता तक पहुंचने के लिए अभी भी 11 विधायकों की जरूरत है।

कांग्रेस से डील लगभग फाइनल

सरकार बनाने की रणनीति के तहत TVK ने सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संपर्क साधा है। कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं और सूत्रों के मुताबिक समर्थन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। पार्टी हाईकमान भी विजय के साथ जाने के पक्ष में बताया जा रहा है। अगर यह समर्थन औपचारिक हो जाता है, तो विजय की राह काफी आसान हो जाएगी।

छोटे दलों पर नजर, मंत्री पद का ऑफर

TVK अब अन्य छोटे दलों को भी साधने में जुटी है। विदुथलाई चिरुथिगल काची, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) जैसे दलों के पास 2-2 विधायक हैं। जानकारी के अनुसार, इन पार्टियों को समर्थन के बदले मंत्री पद देने की पेशकश की गई है। चर्चा है कि कांग्रेस को 2 और अन्य दलों को 3-4 मंत्री पद मिल सकते हैं। विजय गठबंधन सरकार चलाने के लिए तैयार हैं, जिससे बातचीत में तेजी आई है।

DMK से गठबंधन की संभावना बेहद कम

वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के साथ गठबंधन की संभावना लगभग खत्म मानी जा रही है। एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK का कहना है कि जनता ने उन्हें विपक्ष की भूमिका सौंपी है। इसके अलावा, विजय का पूरा चुनाव प्रचार DMK सरकार के खिलाफ रहा, ऐसे में दोनों दलों का साथ आना राजनीतिक तौर पर मुश्किल नजर आ रहा है।

AIADMK में सेंध की कोशिश

सियासी समीकरण को साधने के लिए TVK अब AIADMK पर भी नजर रखे हुए है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ नेता AIADMK के भीतर संपर्क साध रहे हैं। पहले शीर्ष नेतृत्व को मनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अगर बात नहीं बनी तो विधायकों में टूट की संभावना भी जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIADMK के साथ समझौता विजय के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

फ्लोर टेस्ट में बदल सकता है पूरा गणित

तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और बहुमत के लिए 118 का आंकड़ा जरूरी है। लेकिन फ्लोर टेस्ट के दौरान अगर विपक्ष के 30-32 विधायक सदन से वॉकआउट करते हैं, तो प्रभावी संख्या घटकर करीब 204 रह जाएगी। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा लगभग 103 तक आ सकता है। इस स्थिति में विजय मौजूदा समर्थन के आधार पर भी सरकार बनाने की स्थिति में आ सकते हैं। हालांकि, अगर विपक्ष व्हिप जारी कर सभी विधायकों की मौजूदगी सुनिश्चित करता है, तो यह रणनीति काम नहीं कर पाएगी।

राज्यपाल के पास दो अहम विकल्प

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, राज्यपाल के सामने दो रास्ते हैं। पहला, विजय से 118 विधायकों का समर्थन पत्र मांगकर उन्हें सरकार बनाने का न्योता देना। दूसरा, बिना समर्थन पत्र के ही उन्हें शपथ दिलाकर बाद में सदन में बहुमत साबित करने का समय देना। दूसरे विकल्प में विजय को ज्यादा राजनीतिक लचीलापन मिल सकता है।

7 मई को शपथ का दावा

TVK के प्रवक्ता ने दावा किया है कि थलापति विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, इसके लिए जरूरी समर्थन जुटाना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है। अगले 24 से 48 घंटे तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।

जोड़-तोड़ से तय होगी सत्ता की राह

तमिलनाडु में इस बार जनादेश ने किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है, लेकिन सत्ता की चाबी फिलहाल थलापति विजय के हाथ में दिखाई दे रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय गठबंधन, रणनीति और सियासी जोड़-तोड़ के जरिए सत्ता की आखिरी 11 सीढ़ियां कैसे पार करते हैं।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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