Thalapathy Vijay: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, जिससे राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।
सबसे बड़ा झटका अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) को लगा है। TVK ने फिलहाल AIADMK के साथ संभावित गठबंधन को होल्ड पर डाल दिया है, जिससे उसके सत्ता में वापसी के रास्ते मुश्किल हो गए हैं।
वहीं कांग्रेस ने भी बड़ा सियासी दांव चलते हुए द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (DMK) से दूरी बना ली है, जो लंबे समय से उसका सहयोगी दल रहा था। कांग्रेस के इस फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नई लाइन खींच दी है। पार्टी के राज्य प्रभारी गिरीश चोडंकर ने कहा कि यह फैसला जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए लिया गया है।
हालांकि कांग्रेस ने समर्थन के साथ एक शर्त भी रखी है कि गठबंधन में ऐसी किसी भी ताकत को शामिल नहीं किया जाएगा जो संविधान में विश्वास न रखती हो या सांप्रदायिक राजनीति करती हो।
दूसरी ओर DMK ने कांग्रेस के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे ‘पीठ में छुरा घोंपने’ जैसा बताया है। गौरतलब है कि दोनों दलों का गठबंधन 1971 से अलग-अलग चरणों में बना रहा था।
4 मई को आए चुनाव नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल दिया। TVK ने अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, ऐसे में कांग्रेस का समर्थन बेहद अहम हो गया है।
चुनाव में एम. के. स्टालिन की अगुवाई वाली DMK को 59 सीटें मिलीं, जबकि AIADMK 47 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के खाते में 5 सीटें आईं, जबकि अन्य दलों का प्रदर्शन सीमित रहा।
खास बात यह रही कि विजय ने पेरंबूर और तिरुचिरापल्ली (पूर्व) सीट से जीत दर्ज की और उनकी पार्टी को करीब 35% वोट शेयर मिला। पहली बार चुनाव लड़ते हुए TVK का यह प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के संकेत दे रहा है।






