Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से भेजे गए नए युद्धविराम और शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने ईरानी प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण बातचीत एक बार फिर मुश्किल दौर में पहुंच गई है। माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच जारी टकराव और फारस की खाड़ी में बढ़ते संकट को देखते हुए किसी समझौते की संभावना बन सकती है, लेकिन ट्रंप के बयान ने हालात फिर तनावपूर्ण कर दिए हैं।
पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचा ईरान का प्रस्ताव
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने रविवार को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को अपना नया प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव में युद्ध रोकने, फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा बहाल करने, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत की पेशकश की गई थी।
ईरान का दावा है कि उसने बातचीत के लिए “सकारात्मक और व्यावहारिक” जवाब दिया है और अब फैसला अमेरिका को करना है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं दिख रहा।
अमेरिका ने रखीं सख्त शर्तें
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने इस सप्ताह ईरान को 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा था। इसमें सबसे बड़ी शर्त यह थी कि ईरान कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोक दे और अपने पास मौजूद लगभग 440 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे।
इसके बदले अमेरिका ने ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियां वापस करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का प्रस्ताव दिया था।
लेकिन ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को पूरी तरह छोड़ने को तैयार नहीं है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
ट्रंप बोले- ईरान भरोसे के लायक नहीं
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि कई बार दोनों देश समझौते के करीब पहुंचे, लेकिन हर बार बातचीत टूट गई। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि उन पर भरोसा करना आसान नहीं है। ट्रंप ने कहा,
“ईरान लगातार खेल खेल रहा है। दुनिया का कोई भी देश ऐसे जवाब को स्वीकार नहीं करेगा।”
उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा।
“ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका”
ट्रंप ने दावा किया कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान सैन्य रूप से काफी कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका उसकी बची हुई ताकत को भी बहुत जल्दी खत्म कर सकता है।
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ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से कहा है कि बमबारी में तबाह हुए परमाणु ठिकानों से रेडियोधर्मी मलबा हटाने में मदद की जाए, क्योंकि उसके पास ऐसी तकनीक नहीं है। हालांकि ईरान ने इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन फिर शुरू कर सकता है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालना था। यह मिशन पिछले सप्ताह कुछ समय बाद रोक दिया गया था।
बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर पड़ सकता है।
सीजफायर पर भी जताई चिंता
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम बेहद कमजोर स्थिति में है। उन्होंने इसकी तुलना ऐसे मरीज से की जिसकी बचने की संभावना केवल “1 प्रतिशत” हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और बातचीत आगे भी जारी रह सकती है।
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