Railway Ticket Rule Change 2026: भारतीय रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। भारतीय रेलवे के नए नियमों के मुताबिक अब यात्रियों को पूरा रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट रद्द करना होगा। पहले यह सीमा 4 घंटे थी, जिसे अब दोगुना कर दिया गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह फैसला टिकटों की कालाबाजारी और दलालों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लिया गया है। नए नियम 1 से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।
24 से 8 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर आधा पैसा वापस
नए नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री ट्रेन के निर्धारित समय से 24 घंटे से लेकर 8 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करता है, तो उसे केवल 50 प्रतिशत रिफंड ही मिलेगा। इससे दलालों द्वारा अंतिम समय में टिकट ब्लॉक कर कैंसिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
अब 30 मिनट पहले तक बदल सकेंगे बोर्डिंग स्टेशन
रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए बोर्डिंग स्टेशन बदलने की समय सीमा भी बढ़ा दी है। अब यात्री ट्रेन के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। पहले यह सुविधा केवल चार्ट बनने से पहले तक ही उपलब्ध थी।
यह सुविधा खासतौर पर उन शहरों में उपयोगी होगी जहां एक से अधिक रेलवे स्टेशन हैं। यात्री अब अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकेंगे। यह बदलाव IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या रेलवे काउंटर के जरिए किया जा सकता है।
ध्यान रहे, एक बार बोर्डिंग स्टेशन बदलने के बाद यात्री पुराने स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाएंगे।
ट्रेन लेट या कैंसिल होने पर मिलेगा पूरा रिफंड
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में पुराने रिफंड नियम लागू रहेंगे। अगर ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट होती है या पूरी तरह कैंसिल हो जाती है, तो यात्री TDR फाइल कर पूरा रिफंड ले सकते हैं।
वहीं, अगर चार्ट बनने के बाद भी टिकट वेटिंग में रह जाता है, तो वह अपने आप कैंसिल होकर पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा।
क्यों किया गया बदलाव?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, दलाल अक्सर बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे और ग्राहक न मिलने पर आखिरी समय में उन्हें कैंसिल कर देते थे। नए सख्त नियमों से इस ‘कॉर्नरिंग’ (टिकटों की जमाखोरी) पर रोक लगेगी और आम यात्रियों के लिए कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी।







