West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पहुंचे नेताओं ने मुख्यालय के ताले बदल दिए और अपने गुट के नए पोस्टर लगा दिए। हालांकि, कार्यालय के भीतर पहले से लगी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीरों और कटआउट को नहीं हटाया गया, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि उनका विवाद ममता की व्यक्तिगत छवि से नहीं बल्कि पार्टी के नेतृत्व और संगठन पर अधिकार को लेकर है।
मुख्यालय से ही पार्टी संचालन का ऐलान
मुख्यालय पर कब्जे के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने वरिष्ठ नेताओं और पार्टी के कोषाध्यक्ष के साथ बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ है और अब से पार्टी का पूरा संगठनात्मक काम इसी कार्यालय से संचालित किया जाएगा। बागी नेताओं का कहना है कि उन्हें अधिकांश विधायकों, सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है।
Rebel TMC faction seized control of Trinamool Bhavan on Friday, taking over the party’s long-standing headquarters at Kolkata’s Metropolitan Building and intensifying the ongoing leadership tussle.#TMC pic.twitter.com/hEKZJZFRRB
— Ayantika Chattopadhyay ( অয়ন্তিকা ) (@honubroto) July 3, 2026
एक दिन पहले चुनाव आयोग में ठोका था दावा
मुख्यालय पर कब्जे की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बागी गुट ने एक दिन पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष TMC के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था। गुट का कहना है कि पार्टी में बहुमत उनके साथ है, इसलिए चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार भी उन्हें मिलना चाहिए। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए होना तय माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ी बगावत
विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता गया। 3 जून को TMC के 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए। इसके बाद 22 जून को बागी गुट की प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि मामला केवल नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है।
कुनाल घोष को मुख्यालय में नहीं मिली एंट्री
ममता बनर्जी समर्थक गुट के वरिष्ठ नेता कुनाल घोष जब पार्टी मुख्यालय पहुंचे तो गेट पर ताला लगा मिला और उन्हें अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय पर कब्जा राज्य प्रशासन और पुलिस की सहमति से कराया गया है। उन्होंने कहा कि बागी नेता खुद को असली TMC बता रहे हैं, लेकिन उन्हें जनता ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नहीं चुना था, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत मिली थी।
ये भी पढ़ेंः
राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: विनय कटियार बोले- PM मोदी से रात 2 बजे हुई बातचीत, अब सब ठीक होगा; चंपत राय और अनिल मिश्रा जेल जा सकते हैं
ममता के पास कितनी राजनीतिक ताकत बची?
बागी गुट के दावों के मुताबिक, ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति पहले की तुलना में काफी कमजोर हो गई है।
- लोकसभा में TMC के 28 सांसदों में से 20 सांसद बागी गुट के साथ बताए जा रहे हैं। ममता के पास अब केवल 8 सांसद बचे हैं।
- राज्यसभा में 13 सांसदों में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं, जिससे उनकी संख्या घटकर 9 रह गई है।
- विधानसभा में 80 विधायकों में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता बनर्जी के साथ केवल 22 विधायक होने का दावा किया जा रहा है।
क्या बंगाल में दोहराएगा महाराष्ट्र जैसा घटनाक्रम?
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में 2022 में हुई शिवसेना की बगावत से कर रही है। उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे गुट को वैध माना और चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को सौंप दिया था।
इसी तरह अब पश्चिम बंगाल में भी बागी गुट चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा कर चुका है। यदि आयोग बहुमत के आधार पर फैसला देता है, तो तृणमूल कांग्रेस के संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक फैसला सामने आ सकता है।
बीजेपी ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी संकट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी ममता बनर्जी पर हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अब इतिहास बनने की ओर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी को सांसद छोड़ गए, विधायक छोड़ गए, कार्यकर्ता छोड़ गए। पंचायत और पंचायत समिति के सदस्य भी उनका साथ छोड़ चुके हैं। यहां तक कि कई मेयर भी उनके साथ नहीं हैं। अब सिर्फ उनका भतीजा ही उनके साथ दिखाई देता है। तृणमूल कांग्रेस का बहुमत उनके खिलाफ है और ममता बनर्जी अल्पमत में रह गई हैं।”
शाहनवाज हुसैन ने आगे कहा कि अब यह मामला चुनाव आयोग के सामने है और वही तय करेगा कि तृणमूल कांग्रेस का असली गुट कौन-सा है, पार्टी का वैध नेतृत्व किसके पास है और चुनाव चिह्न पर किसका अधिकार होगा।
दिल्ली: भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने टीएमसी में चल रहे अंदरूनी मतभेद पर कहा, “तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में एक इतिहास बन गई है। ममता बनर्जी को सांसद छोड़ गए, विधायक छोड़ गए, कार्यकर्ता छोड़ गए, पंचायत ब्लॉक के जो उनके पंचायत समिति के मेंबर थे, वे भी छोड़ गए, मेयर… pic.twitter.com/KMnSlWldjd
— IANS Hindi (@IANSKhabar) July 3, 2026
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर चुनाव आयोग की सुनवाई पर टिकी है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज, विधायकों और सांसदों के समर्थन तथा संगठनात्मक बहुमत की जांच करेगा। इसके बाद तय होगा कि तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण किस गुट के पास रहेगा। यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है और आने वाले चुनावों पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ेंः





