Gujarat UCC Bill Passed: गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को पास कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड (Uttarakhand) के बाद गुजरात (Gujarat) देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल (Bhupendra Patel) ने इसे सामाजिक सुधार और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान कानून लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
कमेटी की सिफारिश के आधार पर बना कानून
राज्य सरकार ने रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई (Ranjana Prakash Desai) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सभी नागरिकों के लिए समान सिविल कोड लागू करने की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर सरकार ने यह बिल तैयार किया।
शादी और बहुविवाह पर सख्ती
UCC के तहत अब एक से अधिक शादी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। अगर किसी व्यक्ति का पहले से जीवनसाथी है, तो दूसरी शादी को मान्यता नहीं दी जाएगी। बहुविवाह करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
शादी के लिए पुरुषों की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं की 18 साल तय की गई है। साथ ही, हर शादी का 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। जबरन या धोखे से की गई शादी के मामलों में भी सख्त सजा का प्रावधान है।
तलाक के नियम भी बदले
अब तलाक केवल अदालत की मंजूरी के बाद ही मान्य होगा। बिना कानूनी प्रक्रिया के किया गया तलाक अमान्य माना जाएगा और इसके लिए 3 साल तक की सजा हो सकती है।
महिलाओं को बिना किसी शर्त के दोबारा शादी करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, तलाक की डिक्री का रजिस्ट्रेशन भी तय समय सीमा के भीतर कराना जरूरी होगा।
हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक
इस कानून के तहत तलाक के बाद पति-पत्नी सीधे दोबारा शादी कर सकते हैं। यानी किसी तीसरे व्यक्ति से शादी करने जैसी प्रक्रिया (हलाला) की जरूरत खत्म कर दी गई है। हालांकि कानून में इस शब्द का सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन प्रावधान इसी दिशा में बनाए गए हैं।
शादी रद्द करने के प्रावधान
अगर शादी जबरदस्ती, धोखे या पहचान छिपाकर की गई हो, तो कोर्ट में अर्जी देकर उसे रद्द कराया जा सकता है। इसके अलावा शादी के समय किसी अन्य संबंध या गर्भ की स्थिति में भी विवाह निरस्त किया जा सकता है।
विरासत और वसीयत के नए नियम
UCC में संपत्ति के बंटवारे के लिए एक समान व्यवस्था बनाई गई है। अब सभी समुदायों के लिए एक जैसा उत्तराधिकार कानून लागू होगा।
बिना वसीयत के मौत होने पर संपत्ति तय क्रम के अनुसार बांटी जाएगी। वहीं, वसीयत के मामलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वह किसी दबाव या धोखाधड़ी में न बनाई गई हो। हत्या के दोषी व्यक्ति को संपत्ति का अधिकार नहीं मिलेगा, जबकि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी उत्तराधिकार का हक दिया गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता
कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को भी मान्यता दी गई है। इसके तहत कपल को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और दोनों का बालिग होना जरूरी है।
लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और महिला को छोड़े जाने की स्थिति में मेंटेनेंस का अधिकार मिलेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस कानून को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विरोध जताया है। पार्टी का कहना है कि यह धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप है। वहीं सरकार का दावा है कि यह कानून समानता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूत करेगा।
वहीं, गुजरात में UCC लागू होना देश में एक बड़े कानूनी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। शादी से लेकर विरासत और लिव-इन तक हर नागरिक को एक समान कानून के दायरे में लाने की कोशिश की गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।







