Jantar Mantar Protest: NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बड़ा आश्वासन दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनके नाम पर कोई FIR दर्ज नहीं होगी। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपों में दर्ज 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR वापस नहीं ली जाएगी।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार अपने वादे पर पूरी तरह कायम है। उन्होंने अदालत को बताया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमे दर्ज हैं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को भी दी नसीहत
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस कार्रवाई पर भी सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी ऐसे व्यक्ति को भी राहत नहीं मिलनी चाहिए, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड हो या जिसने हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई हो।
वकील ने पूछा- FIR का क्या होगा?
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से पूछा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लिया जाएगा या उन्हें रद्द किया जाएगा। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने जो वादा किया है, उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा किया जाएगा। छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन गंभीर अपराधों के मामलों में कानून अपना काम करेगा।
36 दिन चला था आंदोलन
NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन चला था। प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें थीं, जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया था। इनमें सबसे अहम मांग आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने की थी।
25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की थी।
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दो बड़े मुद्दों पर कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि वह मामले के दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान देगा।
पहला, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और पैलेट गन से घायल हुए लोगों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने पर विचार किया जा सकता है।
दूसरा, यह पता लगाया जाएगा कि पुलिसकर्मियों पर हमला वास्तव में छात्रों ने किया था या फिर आंदोलन के दौरान भीड़ में घुसे असामाजिक तत्वों ने हिंसा को अंजाम दिया था।
पिछली सुनवाई में क्या कहा था कोर्ट ने?
28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे प्रदर्शनकारियों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए।
साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष रखने को कहा था।
डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। इनमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, पुलिस बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, PCR लॉग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य शामिल हैं, ताकि जांच के दौरान किसी भी तरह का सबूत नष्ट न हो।
18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन, पुलिस कार्रवाई और संभावित जांच व्यवस्था पर आगे की सुनवाई करेगा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि छात्रों को राहत देने के लिए कानूनी प्रक्रिया किस प्रकार अपनाई जाएगी और हिंसा के मामलों में दर्ज FIR पर आगे क्या कार्रवाई होगी।
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