Duty Free Sugar: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच राहत की खबर सामने आई है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतें कम होने की उम्मीद है। संगठन के मुताबिक, त्योहारों के दौरान मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। कई जगहों पर खुदरा बाजार में चीनी करीब ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है।
चीनी की कमी नहीं, 10 लाख टन इंपोर्ट एहतियाती कदम: ISMA
ISMA अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि 1 अगस्त तक देश में करीब साढ़े तीन महीने का चीनी स्टॉक उपलब्ध था, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार का 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट का फैसला किसी कमी को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सितंबर-अक्टूबर के त्योहारी सीजन से पहले बाजार को स्थिर रखने और कीमतों में बने अतिरिक्त प्रीमियम को कम करने के लिए है।
#WATCH | Delhi: Niraj Shirgaokar, President of the Indian Sugar Mills Association (ISMA), says, “We are in the month of August right now. As of August 1st, there were almost three and a half months of stock available, so there’s no need to actually panic this month. The… pic.twitter.com/50vUr4AIUR
— ANI (@ANI) August 24, 2026
10 लाख टन चीनी का ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट
केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन रॉ शुगर के बिना सीमा शुल्क आयात की अनुमति दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने भी देश में चीनी की सप्लाई को पर्याप्त बताया है। NFCSF के अध्यक्ष प्रकाश नाईकनवरे के अनुसार, 2025-26 सीजन में नेट शुगर प्रोडक्शन का अनुमान 2.79 करोड़ टन है।
इसमें से करीब 24 लाख टन चीनी इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई है। भारत में सामान्य तौर पर हर साल करीब 3 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होता है।
15 अक्टूबर से पहले पहुंच सकती है पहली खेप
NFCSF के मुताबिक, आयात की गई चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच सकती हैं। फिलहाल ब्राजील से चीनी आयात किए जाने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि थाईलैंड भी चीनी की कमी का सामना कर रहा है।
ब्राजील से भारत तक समुद्री रास्ते से चीनी पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन लगते हैं। इसके बाद इसे रिफाइनरियों और शुगर मिलों तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, वास्तविक समय DGFT की मंजूरी, लेटर ऑफ क्रेडिट और बंदरगाहों पर भीड़ जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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तटीय राज्यों को पहले मिलेगी सप्लाई
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में आयातित रॉ शुगर की सप्लाई पहले पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद उत्तर भारत के राज्यों तक इसे रेल और सड़क मार्ग से भेजा जाएगा।
20 लाख टन के कोटे में सिर्फ 8 लाख टन निर्यात
नाईकनवरे ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अनुकूल नहीं होने के कारण भारत ने तय 20 लाख टन के निर्यात कोटे में से सिर्फ 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया।
केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है।
रॉ शुगर से कैसे बनेगी सफेद चीनी?
ब्राजील से आने वाली रॉ शुगर को सीधे बाजार में खाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसे देश की रिफाइनरियों और शुगर मिलों में प्रोसेस किया जाएगा। प्रोसेसिंग के बाद इसे सफेद दानेदार चीनी में बदला जाएगा और फिर खुदरा बाजार में पहुंचाया जाएगा।





