Sachin Pilot: कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। पायलट को यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह दी गई है। वहीं, बघेल को अब असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब राहुल गांधी के पंजाब दौरे की तैयारियां चल रही हैं। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से करीब एक साल पहले प्रभारी बदलने के फैसले को कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
Congress President Shri @kharge has reassigned/appointed the following party functionaries as AICC General Secretary/ Incharge of the following states, with immediate effect. pic.twitter.com/gt9GrKbgBF
— Congress (@INCIndia) September 5, 2026
चन्नी गुट लंबे समय से था नाराज
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से अंदरूनी गुटबाजी की स्थिति बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक भूपेश बघेल तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे थे।
चन्नी गुट की ओर से आरोप लगाया गया था कि पंजाब के प्रभारी होने के बावजूद बघेल हाईकमान तक पार्टी की जमीनी स्थिति और अंदरूनी मतभेदों की सही जानकारी नहीं पहुंचा पा रहे थे। गुट की मांग थी कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी मजबूत और स्वीकार्य नेता को पंजाब कांग्रेस की जिम्मेदारी दी जाए।
अब सचिन पायलट को प्रभारी बनाए जाने के साथ ही हाईकमान ने इस मांग पर बड़ा फैसला लिया है।
पायलट के सामने पंजाब कांग्रेस को एकजुट करने की चुनौती
सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को खत्म करना और अलग-अलग खेमों को एक मंच पर लाना होगी।
पायलट को संगठन के स्तर पर काम करने और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम किया था।
कांग्रेस को उम्मीद है कि पंजाब में भी पायलट की युवा नेता वाली छवि और संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होगा।
राजस्थान के अनुभव का पंजाब में मिलेगा फायदा?
2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सचिन पायलट को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने करीब पांच साल तक संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच तालमेल बनाने पर काम किया।
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार बनाई। पंजाब में पायलट को जिम्मेदारी देते समय कांग्रेस नेतृत्व इसी संगठनात्मक अनुभव को महत्वपूर्ण मान रहा है।
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चन्नी गुट ने लगाए थे ‘बघेल गो बैक’ के नारे
पंजाब में भूपेश बघेल के खिलाफ चन्नी गुट की नाराजगी कई मौकों पर खुलकर सामने आई थी। कांग्रेस के ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान भी दोनों खेमों के बीच विवाद देखने को मिला।
1 अगस्त को संगरूर में बघेल की मौजूदगी में चन्नी समर्थकों ने विरोध किया। मामला हंगामे और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। वहीं पटियाला में चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी हुई।
6 अगस्त को लुधियाना में चन्नी गुट के समर्थक ‘बघेल गो बैक’ लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध करते नजर आए। दोनों खेमों के बीच तीखी झड़प की स्थिति भी बनी।
पंजाब कांग्रेस के इतिहास में यह पहला मौका बताया गया, जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने किसी प्रदेश प्रभारी के खिलाफ ‘गो बैक’ के पोस्टर लगाए।
3-4 सितंबर की बैठकों के बाद बढ़ी हलचल
3 सितंबर को दिल्ली में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग की राहुल गांधी की टीम के साथ बैठक हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी और संगठन की स्थिति पर चर्चा हुई।
इसके बाद 4 सितंबर को दिल्ली में संगठन की बैठक हुई, जिसमें चन्नी गुट के नेता राणा गुरजीत सिंह भी शामिल हुए। इस दौरान उनकी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और सचिन पायलट से मुलाकात हुई।
राणा गुरजीत ने बाद में कहा कि उस समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया जाने वाला है। उन्होंने पायलट से मुलाकात के दौरान कहा था कि पंजाब के लोग उन्हें पसंद करते हैं।
चन्नी ने किया पायलट का स्वागत
सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने उनका स्वागत किया और इस फैसले के लिए कांग्रेस हाईकमान का धन्यवाद किया।
वहीं, पंजाब से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट की युवा नेता की छवि का पंजाब में पार्टी को फायदा मिल सकता है। पायलट की मां पंजाबी हैं और वे पंजाबी भाषा भी अच्छी तरह समझते हैं।
2027 चुनाव पर नजर
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ कांग्रेस सत्ता में वापसी की कोशिश करेगी। ऐसे में पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने, गुटबाजी खत्म करने और कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करने की बड़ी चुनौती है।
सचिन पायलट की नियुक्ति को कांग्रेस हाईकमान की इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि पायलट पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को कितना एकजुट कर पाते हैं और 2027 के चुनाव में पार्टी को कितना फायदा पहुंचा पाते हैं।






