Parliament Special Session: केंद्र सरकार लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी और महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना है। इस सत्र में संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून में बदलाव से जुड़े विधेयकों को फिर से लाया जा सकता है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख को लेकर सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इस बार विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगी है। इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत की जा रही है। तमिलनाडु की पार्टी DMK का समर्थन हासिल करने पर भी सरकार की नजर है।
इससे पहले अप्रैल में बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में सरकार को झटका लगा था। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया था। अब सरकार दोबारा इस मुद्दे पर आगे बढ़ने की तैयारी में है।
लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए कितने वोट चाहिए?
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सांसदों के कम से कम दो-तिहाई वोट जरूरी होते हैं। ऐसे में सरकार के लिए पर्याप्त सांसदों का समर्थन हासिल करना अहम होगा।
अप्रैल में विधेयक पर मतदान के दौरान 528 सांसदों ने अपने मत का इस्तेमाल किया था। इनमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में, जबकि 230 ने इसके विरोध में वोट दिया था। उस समय विधेयक को पारित कराने के लिए 352 मतों की जरूरत थी। इस तरह समर्थन में 54 वोट कम पड़ गए और विधेयक पारित नहीं हो सका।
अब सरकार नए सिरे से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, आगामी सत्र में मतदान के दौरान सदन में कितने सांसद मौजूद रहेंगे और विधेयक को कितना समर्थन मिलेगा, यह अभी तय नहीं है।
DMK समेत छोटे दलों से संपर्क साध रही सरकार
विधेयकों को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार DMK सहित अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करने की संभावनाएं तलाश रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार कुछ छोटे दलों से भी बातचीत कर रही है, ताकि संसद में अपना संख्याबल बढ़ाया जा सके।
परिसीमन का विषय दक्षिण भारत के कई राज्यों में महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा रहा है। इन राज्यों में लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं। ऐसे में विधेयकों पर क्षेत्रीय दलों का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, DMK ने इन विधेयकों का समर्थन करने के संबंध में क्या फैसला लिया है, इस पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी से की सर्वदलीय बैठक की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संसद में विधेयक पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की जानी चाहिए।
खड़गे ने सरकार से आग्रह किया कि व्यापक संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश न की जाए। उनके मुताबिक, परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी दलों की राय लेना जरूरी है।
उन्होंने संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया। मानसून सत्र की आखिरी बैठक 13 अगस्त को हुई थी, लेकिन 16 अक्टूबर तक लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ था।
मानसून सत्र के बाद अब तक क्यों नहीं हुआ सत्रावसान?
संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को आयोजित हुई थी। इसके बाद दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया। इस बीच विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, संसद का सत्रावसान नहीं होने की स्थिति में सरकार को बैठक बुलाने की प्रक्रिया में अलग व्यवस्था अपनाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और कार्यसूची को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
अप्रैल में पेश हुए थे तीन विधेयक
केंद्र सरकार ने अप्रैल में लोकसभा की सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव के लिए तीन विधेयक पेश किए थे। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल थे।
इन विधेयकों के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन की प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव था। इसका संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से भी है।
महिला आरक्षण कानून के तहत आरक्षण के क्रियान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। अप्रैल में संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया, जिसके बाद इससे जुड़े अन्य दोनों विधेयकों पर आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी।
अब सरकार इन प्रस्तावों को फिर से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में संभावित विशेष सत्र में परिसीमन, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लेकर होने वाली चर्चा पर सभी की नजर रहेगी।






