Iran-US Tension: ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि अब उसे अमेरिका पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा। दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच यह बयान हालात को और गंभीर बनाता है।
विदेश मंत्री का बड़ा बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपने वादों से पीछे हटता रहा है, जिससे भरोसा पूरी तरह टूट चुका है।
2015 परमाणु समझौते का जिक्र
अराघची ने ईरान परमाणु समझौता 2015 का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका पहले भी इस अहम समझौते से हट चुका है। ऐसे में किसी नए समझौते या बातचीत पर भरोसा करना मुश्किल है।
बातचीत नहीं, सिर्फ संदेश
ईरान ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई औपचारिक वार्ता नहीं हो रही है। हालांकि, सहयोगी देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन इसे वास्तविक बातचीत नहीं माना जा सकता।
जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण
मध्य पूर्व में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियां, ड्रोन हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
ट्रंप का दावा-युद्ध अंतिम चरण में
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अगले 2 से 3 हफ्तों में खत्म हो सकता है।
अमेरिका ने हासिल किया लक्ष्य
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, और यह लक्ष्य अब पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हालात अनुकूल रहे तो समझौते के जरिए युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।
वैश्विक असर और बढ़ती चिंता
इस टकराव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा?
एक तरफ ईरान का सख्त रुख और अमेरिका पर अविश्वास, दूसरी ओर ट्रंप का जल्द युद्ध खत्म होने का दावा—इन दोनों के बीच स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि हालात शांति की ओर बढ़ेंगे या टकराव और गहराएगा।






