Global Oil Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। इसी बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने एक अहम पहल करते हुए “होर्मुज समिट” बुलाया है। इस समिट का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को दोबारा खोलना और वैश्विक सप्लाई चेन को सामान्य करना है।
भारत को मिला खास आमंत्रण
इस अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल (Randhir Jaiswal) के अनुसार, भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Vikram Misri) वर्चुअली इस समिट में हिस्सा ले रहे हैं। यह संकेत है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।
क्यों बना संकट का कारण होर्मुज स्ट्रेट?
ईरान में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसकी वजह से तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे भारत, चीन, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है।
क्या है होर्मुज समिट का एजेंडा?
यह समिट एक डिप्लोमैटिक और मैरिटाइम कोऑर्डिनेशन प्लेटफॉर्म है, जिसमें 30–35 देश शामिल हो रहे हैं। इसमें तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो रही है:
- जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल करना
- फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन को फिर से शुरू करना
ब्रिटेन की अगुवाई, वैश्विक समर्थन
इस बैठक की अगुवाई ब्रिटेन की वरिष्ठ मंत्री यवेटे कूपर (Yvette Cooper) कर रही हैं। पहले चरण में कूटनीतिक और राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा की जा रही है, ताकि बिना किसी बड़े सैन्य टकराव के इस संकट का समाधान निकाला जा सके।
ईरान से संपर्क में भारत, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही
भारत इस पूरे मामले में संतुलित रणनीति अपनाते हुए ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में 6 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इन जहाजों में LPG, LNG और अन्य आवश्यक उत्पाद शामिल थे। भारत का फोकस अपने व्यापार और ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना है, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना भी प्राथमिकता है।
क्या हो सकता है वैश्विक असर?
होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गहराई से पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, ऐसे में इसकी रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ेगी। खासकर एशियाई और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका अधिक दबाव पड़ेगा, जहां ऊर्जा आयात पर निर्भरता ज्यादा है।
इसके अलावा, वैश्विक व्यापार और शिपिंग सेक्टर भी प्रभावित होगा, क्योंकि बड़ी संख्या में जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में सप्लाई चेन बाधित हो सकती है और जरूरी सामान की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
बता दें कि “होर्मुज समिट” सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने की एक बड़ी कोशिश है। इसमें भारत की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि वह अब सिर्फ एक उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।







