Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंचता जा रहा है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के 8 रणनीतिक पुलों को निशाना बनाने की धमकी देकर हालात और गंभीर कर दिए हैं। इन पुलों को क्षेत्र की लाइफलाइन माना जाता है, क्योंकि ये न सिर्फ आम लोगों की आवाजाही बल्कि तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बेहद अहम हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की लिस्ट में कुवैत, UAE, सऊदी अरब और जॉर्डन के बड़े पुल शामिल हैं, जो पूरे खाड़ी क्षेत्र की कनेक्टिविटी का आधार हैं।
कौन-कौन से पुल ईरान के निशाने पर?
ईरान जिन पुलों को टारगेट कर रहा है, उनमें कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद समुद्री पुल, UAE के शेख जायद ब्रिज, अल मकता ब्रिज और शेख खलीफा ब्रिज, सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे, और जॉर्डन के किंग हुसैन ब्रिज, डामिया ब्रिज व अबदून ब्रिज शामिल हैं।
इन पुलों पर किसी भी तरह का हमला पूरे क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन और आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
US-इजराइल के हमले के बाद भड़का ईरान
इस तनाव की बड़ी वजह हाल ही में हुआ हमला है, जिसमें अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करज शहर में बने B1 ब्रिज को निशाना बनाया। दो बार किए गए इस हमले में पुल पूरी तरह तबाह हो गया और दो लोगों की मौत हो गई।
करीब ₹3800 करोड़ की लागत से बना यह पुल इसी साल शुरू हुआ था और इसे क्षेत्र के सबसे ऊंचे पुलों में गिना जा रहा था। इस हमले के बाद ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र
होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है, अब इस पूरे विवाद का केंद्र बन चुका है। इस संकट को लेकर ब्रिटेन की पहल पर 60 से ज्यादा देशों की बैठक हुई, जिसमें भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि इस संकट में अब तक केवल भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 3 भारतीय नाविक जान गंवा चुके हैं, जिससे भारत की चिंता और बढ़ गई है।
कुवैत की रिफाइनरी पर बार-बार हमला
तनाव के बीच कुवैत के मीना अल-अहमदी पोर्ट स्थित ऑयल रिफाइनरी पर दो हफ्तों में तीसरी बार हमला हुआ है। यह मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और यहां पर बार-बार हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को और गहरा कर रहे हैं।
कुवैत और ईरान के बीच कम दूरी होने के कारण यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड एक बार फिर ऑपरेशन के लिए तैयार हो गया है।
आग लगने के बाद मरम्मत पूरी कर इसे फिर से तैनात किया गया है। अमेरिकी छह फ्लीट के मुताबिक, यह जहाज अब किसी भी मिशन के लिए पूरी तरह सक्षम है, जिससे मिडिल ईस्ट में सैन्य दबाव और बढ़ सकता है।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा है मिडिल ईस्ट?
ईरान की सीधी धमकी, US-इजराइल के हमले, होर्मुज संकट और लगातार हो रहे हमलों ने मिडिल ईस्ट को बेहद नाजुक स्थिति में ला खड़ा किया है। अगर इन रणनीतिक पुलों पर हमला होता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। बता दें कि स्थिति अब बेहद संवेदनशील है, जहां कोई भी छोटी घटना बड़े टकराव का रूप ले सकती है।






