Salim Dola Arrest: इस्तांबुल में दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी (D-Company) से जुड़े बड़े ड्रग्स हैंडलर सलीम डोला की गिरफ्तारी ने अंडरवर्ल्ड नेटवर्क में हलचल मचा दी है। तुर्की की इंटेलिजेंस एजेंसी “MİT” और इस्तांबुल पुलिस की नारकोटिक्स यूनिट्स द्वारा किए गए इस संयुक्त ऑपरेशन में इंटरपोल के रेड नोटिस पर वांछित इस भारतीय तस्कर को दबोचा गया, जिसके ठिकाने से भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स, नकदी और फर्जी दस्तावेज़ बरामद होने का दावा किया गया है।
इस्तांबुल ऑपरेशन: सलीम डोला गिरफ्तार
दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से जुड़ा माना जाने वाला फरार अपराधी सलीम डोला एक संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई तुर्की की इंटेलिजेंस एजेंसी “MİT” और इस्तांबुल पुलिस की नारकोटिक्स यूनिट्स ने मिलकर की। सलीम डोला को इंटरपोल के रेड नोटिस पर वांछित भारतीय ड्रग तस्कर के रूप में ट्रैक किया जा रहा था।
फर्जी पहचान और भारी बरामदगी
रिपोर्टों के अनुसार, सलीम डोला फर्जी पहचान और कथित तौर पर जाली अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों के सहारे छिपकर रह रहा था। तुर्की मीडिया ने यह भी दावा किया है कि उसके ठिकाने से 126 किलो 141 ग्राम सिंथेटिक ड्रग्स, नकदी और फर्जी UAE पासपोर्ट व आईडी बरामद हुई है।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे नेटवर्क तक पहुंच
यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी को सिर्फ एक भगोड़े की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क तक पहुंचने वाली कार्रवाई माना जा रहा है, जिसके तार भारत में सक्रिय ड्रग्स तस्करी मॉड्यूल और दाऊद इब्राहिम के आपराधिक ढांचे से जुड़े हैं।
भारत में नेटवर्क का बड़ा ऑपरेटर
सलीम डोला कोई छोटा-मोटा नाम नहीं है। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, वह भारत में दाऊद के ड्रग्स कारोबार से जुड़े नेटवर्क को हैंडल करता है, जबकि उसका ऑपरेशन दुबई जैसे ठिकानों से भी जुड़ा हुआ है। इसीलिए उसका नाम सिर्फ अंडरवर्ल्ड के पुराने चेहरों में नहीं, बल्कि भारत में फैलते सिंथेटिक ड्रग्स नेटवर्क के सक्रिय ऑपरेटरों में लिया जाता है।
मल्टी-स्टेट ड्रग कार्टेल से कनेक्शन
सबसे अहम बात यह है कि उसका नेटवर्क किसी एक शहर या एक रूट तक सीमित नहीं बताया गया। रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में महाराष्ट्र पुलिस ने एक मल्टी-स्टेट ड्रग कार्टेल का भंडाफोड़ किया था, जिसकी कड़ियां महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और गुजरात तक पाई गईं, और इस कार्टेल का संबंध सलीम डोला से जोड़ा गया।
सांगली MD ड्रग्स फैक्ट्री केस में नाम
उसका नाम महाराष्ट्र के सांगली MD ड्रग्स फैक्ट्री केस में भी सामने आया। 2024 की रिपोर्टों में कहा गया कि उसके और उसके बेटे ताहिर डोला के खिलाफ मुंबई पुलिस के अनुरोध पर CBI द्वारा 25 नवंबर 2024 को इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया था।
2018 फेंटानिल केस से पुराना कनेक्शन
इससे पहले 2018 के मुंबई सांताक्रूज फेंटानिल केस में भी उसका नाम सामने आया था, जहां 100 किलो प्रतिबंधित ड्रग बरामद होने की बात रिपोर्टों में दर्ज है। उस समय इसकी कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपये बताई गई थी।
प्रत्यर्पण बना सबसे बड़ा सवाल
अब अगला सवाल भारत प्रत्यर्पण का है, और यहीं से मामला और संवेदनशील हो जाता है। भारत और तुर्की के बीच प्रत्यर्पण संधि मौजूद है, इसलिए कानूनी तौर पर उसे भारत लाने का रास्ता खुला है। लेकिन यह अपने-आप नहीं होगा, क्योंकि तुर्की की कार्रवाई केवल भारत के नोटिस पर आधारित नहीं दिखती।
तुर्की में कानूनी प्रक्रिया पहले
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, ड्रग्स, नकदी और फर्जी दस्तावेज़ों की बरामदगी ने तुर्की के अपने आपराधिक और इमिग्रेशन कानूनों के तहत भी केस को मजबूत किया है। इसी वजह से यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि सलीम डोला को तुरंत या निश्चित रूप से भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। पहले तुर्की की कानूनी प्रक्रिया चलेगी, उसके बाद भारत की ओर से औपचारिक दस्तावेज़, लंबित केस, वारंट और प्रत्यर्पण अनुरोध की मजबूती अहम होगी।
पूछताछ से खुल सकते हैं बड़े राज
इतना जरूर है कि दाऊद नेटवर्क के लिए असली चिंता अब गिरफ्तारी भर नहीं, बल्कि पूछताछ और कानूनी सहयोग की अगली परत है। अगर सलीम डोला पूछताछ में बोलता है, तो ड्रग्स सप्लाई चेन, भारत में बैठे लोकल हैंडलर, राजनीतिक संरक्षण, विदेशी फाइनेंसर, फर्जी दस्तावेज़ गिरोह और डी-कंपनी की उन छिपी कड़ियों का खुलासा हो सकता है, जो अब तक परछाइयों में चल रही थीं।
अंडरवर्ल्ड की ‘चलती-फिरती फाइल’
इस्तांबुल में पकड़ा गया यह शख्स सिर्फ एक भगोड़ा नहीं, बल्कि उस अंडरवर्ल्ड ढांचे की चलती-फिरती फाइल हो सकता है, जिसने भारत के भीतर अपराध, नशा और पैसे के रास्तों को जोड़ रखा था।
डी-कंपनी के लिए बड़ा खतरा
दाऊद का नेटवर्क लंबे समय से यह मानकर चलता रहा कि नाम बदलकर, देश बदलकर और नकली कागज़ों के सहारे कानून को धोखा दिया जा सकता है।
आगे क्या होगा?
अब देखना यह है कि इस्तांबुल की यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी बनकर रह जाएगी, या फिर यही वह धागा साबित होगी जिससे डी-कंपनी के भारत से जुड़े अपराध नेटवर्क की पूरी सिलाई उधड़ना शुरू होती है।






