West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसदों के एक बागी गुट ने संगठन से अलग होकर नई राजनीतिक दिशा अपनाने का ऐलान किया है। यह गुट अब त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में शामिल होने की तैयारी में है।
TMC की बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने संसद के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर अपने फैसले की औपचारिक ऐलान भी कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने संसद में अलग बैठने की जगह की मांग भी रखी है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, “हमने अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। हमने यह भी बताया है कि हम नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय कर रहे हैं।”
#WATCH | Delhi: After meeting Lok Sabha Speaker Om Birla, Rebel TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar says, “We requested separate seating arrangements. we’ve said that we are merging with the Nationalist Citizens Party.” pic.twitter.com/t0zR64bD0x
— ANI (@ANI) June 14, 2026
BJP नेताओं से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
इससे पहले बागी सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की थी। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया कि यह गुट आगे चलकर BJP के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन दे सकता है।
गुट के बड़े दावे
बागी सांसदों ने दावा किया है कि उनके पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है। उन्होंने यह भी कहा कि वे संसद में अलग पहचान के साथ काम करना चाहते हैं और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति अब असहज हो चुकी है।
गुट की ओर से यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर वे केंद्र की NDA सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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TMC का पलटवार
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के TMC विधायक मदन मित्रा ने बागी सांसदों के लोकसभा स्पीकर से मुलाकात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ है, वह सही नहीं है। मदन मित्रा ने कहा, ये सांसद जनता द्वारा इसलिए चुने गए थे ताकि वे TMC को मजबूत करें और पार्टी नेतृत्व के साथ मिलकर काम करें, न कि अलग संगठन बनाने के लिए।
उन्होंने आगे कहा कि अब ये लोग अपने रास्ते से भटक गए हैं, लेकिन यह सभी सांसद ऐसा नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अलग राजनीतिक दल बनाने के लिए जितनी संख्या की जरूरत होती है, वह इस छोटे समूह के पास मौजूद नहीं है।
#WATCH | Kolkata | On TMC rebel MPs meet Lok Sabha Speaker Om Birla, TMC MLA Madan Mitra says, “I am going into our party chairperson’s residence and I will talk about this if I get a chance, but what happened is unfair. These people did not contest with the intention of forming… pic.twitter.com/HZedoadcXh
— ANI (@ANI) June 14, 2026
बागी सांसदों का बयान
बागी गुट के सांसद अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी बातचीत सकारात्मक रही है और वे देशहित में काम करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे BJP से सहयोग लेने में भी हिचकिचाएंगे नहीं।
अरूप चक्रवर्ती ने यह भी बताया कि सायोनी घोष उनके गुट की नेता हैं और वह भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद थीं।
#WATCH | Delhi: After meeting Lok Sabha Speaker Om Birla, Rebel TMC MP Arup Chakraborty says, “We met with the Speaker. We have submitted everything and demanded a bloc. We will receive it… We had a very nice and successful discussion with him. All 20 members were there… Our… pic.twitter.com/9yqwUB3o2o
— ANI (@ANI) June 14, 2026

वहीं, TMC के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि असली पार्टी कौन है, इसका फैसला अब अदालत में होगा। वहीं पार्टी के अन्य नेताओं ने कहा कि जो सांसद जनता के वोट से चुने गए थे, वे संगठन के साथ रहने के लिए बाध्य हैं।
#WATCH | Delhi: TMC rebel MP Sudip Bandyopadhyay says, “We have joined the Nationalist Citizens’ Party. This is a political party. It is a recognised regional party. We have merged with it… It will be decided in the court which one the real TMC is.” pic.twitter.com/BEbG5atOUx
— ANI (@ANI) June 14, 2026
NCPI और नई राजनीतिक दिशा
जिस पार्टी में बागी गुट के विलय की बात हो रही है, वह त्रिपुरा की छोटी क्षेत्रीय पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) है। यह चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड तो है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी अभी स्पष्टता नहीं है।


राजनीतिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर यह बागी गुट वास्तव में NCPI में शामिल होकर NDA के साथ जुड़ता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल TMC की लोकसभा में ताकत प्रभावित हो सकती है, बल्कि आने वाले चुनावों में भी समीकरण बदल सकते हैं।
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