US Iran Nuclear Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच कराने के लिए तैयार हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, इससे दुनिया को यह भरोसा मिलेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की दोबारा ईरान में तैनाती हो सकती है।
हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि IAEA के साथ सहयोग पहले से तय नियमों के तहत जारी रहेगा और परमाणु मुद्दे पर कोई नया समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड में करीब 18 घंटे चली अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान किसी नई सहमति पर मुहर नहीं लगी।
ईरानी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में 60 दिन की राहत
हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की सीमित राहत दी है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और यूरेनियम के भंडार जैसे सबसे जटिल मुद्दों पर बातचीत अभी भी जारी है और इन पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।
ओमान पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री और संसद अध्यक्ष
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ आधिकारिक दौरे पर मस्कट पहुंचे। वहां ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अलबुसैदी ने उनका स्वागत किया।

बैठक में दोनों देशों ने ओमान-ईरान संबंधों को मजबूत करने, ईरान-अमेरिका समझौता प्रक्रिया, क्षेत्रीय तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
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संयुक्त राष्ट्र ने लेबनान में हिंसा में कमी का स्वागत किया
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने कहा है कि 2 मार्च को संघर्ष शुरू होने के बाद रविवार को पहली बार लेबनान में कोई हवाई हमला दर्ज नहीं किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि यह शांति सोमवार सुबह तक भी बनी रही।
हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि इजराइली विमानों द्वारा लेबनानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसकी संख्या पहले के मुकाबले कम हुई है।
ईरान ने अमेरिका से बातचीत का बचाव किया
ईरान के संसद अध्यक्ष बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका के साथ बातचीत करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत का मकसद लेबनान में जारी रक्तपात को रोकना था। उन्होंने कहा, “अगर हम स्विट्जरलैंड नहीं गए होते, तो लेबनान के मुसलमानों और शियाओं का और ज्यादा खून बहता।”
अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच अगली वार्ता मंगलवार से शुरू होने की उम्मीद है। इसमें सैन्य और राजनीतिक दोनों मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब लेबनान में युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और हिजबुल्लाह और इजराइल एक-दूसरे पर संघर्ष विराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं।
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