Switzerland US Iran talks: स्विट्जरलैंड में रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम वार्ता के दौरान तनाव बढ़ गया। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से नाराज होकर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत रोक दी और बैठक स्थल से बाहर निकल गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ संयुक्त फोटो सेशन में शामिल होने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अब भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल है और बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा विवाद
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बातचीत शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि ईरान को लेबनान में अपने सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह को रोकना होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर हिजबुल्लाह ने अपनी गतिविधियां जारी रखीं तो अमेरिका एक बार फिर ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
Iran must immediately stop their highly paid PROXIES in Lebanon from causing trouble. If they don’t, we’ll hit Iran very hard again, just like we did last week, only harder!!! President DONALD J. TRUMP
( TS: Jun 21 2026, 9:30 AM ET )… pic.twitter.com/4FYtEyoF8s
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) June 21, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के बयान के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपना विरोध दर्ज कराया और वार्ता के औपचारिक कार्यक्रम से दूरी बना ली। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सेशन की पहले से योजना बनाई गई थी, लेकिन ईरानी पक्ष ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
ईरान बोला- अमेरिकी धमकियों से नहीं डरेंगे
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव और धमकियों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।
🚨 Amid negotiations in Zurich, Switzerland, following Trump’s military threat against Iran, Ghalibaf tweeted:
“Our armed forces are prepared to respond to the aggressors in a NEW way.” pic.twitter.com/Jr8Fbb3D4P— IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) (@iribnews_irib) June 21, 2026
दूसरी तरफ, स्विट्जरलैंड में मौजूद एक अमेरिकी अधिकारी ने ईरानी मीडिया के दावों को गलत बताया। अधिकारी ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता नहीं छोड़ी है और न ही किसी मध्यस्थ देश को बातचीत से हटने की जानकारी दी गई है।
80 मिनट चली अमेरिका-ईरान वार्ता
रविवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई। इस बैठक का उद्देश्य 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना था। हालांकि, पहली ही बैठक में कई बड़े मतभेद सामने आ गए, जिससे आगे की प्रक्रिया मुश्किल होती दिखाई दे रही है।
इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर के अधिकारियों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। फिलहाल अगली बैठक की तारीख तय नहीं की गई है।
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होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी के बाद समुद्री व्यापार पर असर दिखाई देने लगा है। शिपिंग डेटा कंपनी केप्लर के अनुसार, शनिवार को जहां 26 जहाज इस मार्ग से गुजरे थे, वहीं रविवार को यह संख्या घटकर केवल 5 रह गई।
इन 5 जहाजों में 3 विशाल तेल टैंकर (VLCC) शामिल थे, जो करीब 20 लाख बैरल सऊदी कच्चा तेल और ईंधन लेकर जा रहे थे। इनमें से एक जहाज जापान की ओर रवाना हुआ था। हालांकि, केप्लर ने यह भी कहा कि वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है, क्योंकि कई जहाज सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं।
इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया है। ईरान का आरोप है कि इजराइल और अमेरिका ने अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन किया है। वहीं, अमेरिकी सेना का कहना है कि समुद्री मार्ग पर जहाजों का संचालन अभी भी जारी है।
ईरान की शर्त- पहले लेबनान में संघर्ष खत्म हो
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि आगे की बातचीत तभी संभव होगी, जब इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय तनाव खत्म किए बिना किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुंचना संभव नहीं है।
तीन बड़े मुद्दों पर फंसी वार्ता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत में तीन अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इनमें होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने को लेकर ईरान के रुख को स्पष्ट करना, दक्षिणी लेबनान में स्थायी युद्धविराम लागू कराना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े संभावित नए समझौते की शर्तें शामिल हैं। इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर के अधिकारियों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
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