JD Vance on Israel: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल की नीतियों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि इजराइल को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की वास्तविकता समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में इजराइल लगातार अलग-थलग पड़ता जा रहा है और हर समस्या का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता।
पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अगर वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा होते, तो अपने सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका पर सार्वजनिक रूप से सवाल नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे नेता हैं जो इजराइल के प्रति सबसे ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।
इजराइल के मंत्रियों पर साधा निशाना
वेंस ने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि इजराइल के पास सीमित विकल्प हैं। उन्होंने कहा,
“इजराइल केवल 90 लाख आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।”
🚨 WOW! JD Vance is DIRECTLY calling out Israeli cabinet members for their personal attacks on President Trump
“Donald J. Trump is the ONLY head of state in the ENTIRE WORLD who is sympathetic to the nation of Israel at this moment in time, and he happens to be the head of state… pic.twitter.com/0H9yGH8ubL
— Nick Sortor (@nicksortor) June 18, 2026
स्विट्जरलैंड दौरा रद्द, ईरान वार्ता पर सवाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड की अपनी प्रस्तावित यात्रा भी रद्द कर दी है। उन्हें ईरान के प्रतिनिधियों के साथ अगले दौर की बातचीत में शामिल होना था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी ढांचे को अंतिम रूप दिए जाने में देरी के कारण यह यात्रा टाल दी गई।
इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच होने वाली आगामी वार्ता के समय और दिशा को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अमेरिका ने हटाई ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी
शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ घंटों बाद अमेरिका ने ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी भी हटा ली है।
अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि अब अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से निकलने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं डालेगी। नाकेबंदी लागू कराने से जुड़ी सभी सैन्य कार्रवाइयों को भी रोक दिया गया है।
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद रहेंगे और समझौते की शर्तों के पालन पर नजर रखेंगे।

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ईरान की चेतावनी- समझौता तोड़ा तो करारा जवाब मिलेगा
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया गया तो ईरान कड़ा जवाब देगा।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि दूसरा पक्ष बेईमानी करता है, समझौता तोड़ता है या जरूरत से ज्यादा मांगें रखता है, तो ईरान बिना हिचकिचाहट करारा जवाब देगा।
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका युद्ध के दौरान पहले भी जवाब देख चुका है और दोबारा वही गलती करने पर उससे भी अधिक कठोर प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
گوشبفرمانیم، وظیفهٔ محولشده به ما توسط مقام معظم رهبری پیگیری تحقق شروط و بندهای تفاهم است.
در صورت بدعهدی، پیمانشکنی و زیادهخواهی طرف مقابل هیچ تردیدی در پاسخ کوبنده به دشمن نداریم.
یکبار در جنگ سیلی خوردند، اگر بخواهند دوباره همان مسیر را بروند سیلی محکمتری خواهند خورد.
— محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) June 18, 2026
ट्रंप पर अमेरिका में उठे सवाल
डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी विवाद बढ़ गया है। कई रिपब्लिकन नेताओं ने सवाल उठाया है कि ट्रंप आखिर सैन्य दबाव की रणनीति से पीछे क्यों हट गए।
पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने इस समझौते को “तुष्टीकरण” करार देते हुए कहा कि इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि प्रतिबंधों में ढील मिलने से ईरान को अरबों डॉलर की आर्थिक राहत मिलेगी और इससे अमेरिका की सौदेबाजी की ताकत घट सकती है।
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