राहुल गांधी केस: हाईकोर्ट ने FIR वाला अपना ही आदेश बदला, नोटिस जरूरी माना; अगली सुनवाई 20 अप्रैल को

Rahul Gandhi FIR Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सांसद राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में अपने ही पहले दिए गए आदेश में बड़ा बदलाव कर दिया है। कोर्ट ने अब स्पष्ट किया है कि बिना संबंधित पक्ष को नोटिस दिए सीधे FIR दर्ज करने का आदेश देना उचित नहीं है। इसी के साथ अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की है।

यह मामला याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए उस आरोप से जुड़ा है जिसमें राहुल गांधी पर विदेशी नागरिकता रखने का दावा करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

पहले FIR और CBI जांच का आदेश, फिर बदला फैसला

शुक्रवार (17 अप्रैल) को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने प्रारंभिक रूप से राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था।

हालांकि, आदेश को अंतिम रूप देने से पहले न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की। पुराने न्यायिक फैसलों और कानूनी प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद कोर्ट ने पाया कि ऐसे मामलों में बिना नोटिस दिए सीधा FIR का आदेश देना न्यायसंगत नहीं है।

कोर्ट का संशोधित रुख

अपने संशोधित आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी आपराधिक कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस देना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन हर स्थिति में जरूरी है और बिना सुनवाई का अवसर दिए कोई भी कठोर आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि अब राहुल गांधी को नोटिस जारी किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

केंद्र और राज्य सरकार का पक्ष

इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से वकील एस.बी. पांडेय और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से डॉ. बीके सिंह कोर्ट में पेश हुए। दोनों ने मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अपनी दलीलें रखीं। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से बिंदेश्वरी पांडेय ने भी पक्ष रखते हुए आरोपों को विस्तार से अदालत के सामने प्रस्तुत किया।

याचिकाकर्ता के आरोप

यह याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की है। उनका आरोप है कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और इसी आधार पर उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

केस का इतिहास

यह मामला शुरुआत में रायबरेली की MP/MLA कोर्ट में दायर किया गया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर लखनऊ ट्रांसफर किया गया। इसके बाद निचली अदालत ने 28 जनवरी 2026 को याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। यहां पहले FIR का आदेश दिया गया था, जिसे अब संशोधित कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना रुख

इसी तरह के एक मामले में 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि किसी दस्तावेज में किसी व्यक्ति को विदेशी नागरिक बताए जाने मात्र से उसकी नागरिकता तय नहीं की जा सकती।

राहुल गांधी से जुड़े अन्य मामले

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहले से ही कई आपराधिक और मानहानि से जुड़े मामले लंबित हैं। इनमें सबसे प्रमुख सुल्तानपुर मानहानि केस शामिल है, जिसमें 2018 के एक बयान को लेकर बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने उन पर मानहानि का आरोप लगाया था। इस मामले में कोर्ट की कार्यवाही जारी है और हाल ही में अदालत ने लगातार स्थगन लेने पर कड़ी टिप्पणी भी की थी।

इसके अलावा लखनऊ की एक अदालत में वीर सावरकर से जुड़े कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर भी मामला दर्ज है। इस केस में सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से जुर्माने की कार्रवाई तक की जा चुकी है, जिससे यह मामला भी लगातार चर्चा में बना हुआ है।

इसी तरह हाथरस से जुड़ा एक मानहानि केस भी विचाराधीन है, जिसमें आरोप है कि एक आपराधिक मामले में कोर्ट से दोषमुक्त हुए लोगों को गलत तरीके से गैंगरेप का आरोपी बताया गया था। यह मामला भी एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है।

इन सभी मामलों के चलते राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न अदालतों में कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है और समय-समय पर इन मामलों की सुनवाई होती रहती है।

कुल मिलाकर हाईकोर्ट के संशोधित आदेश के बाद यह मामला अब नए चरण में पहुंच गया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले नोटिस जारी किया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी, जिस पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।

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Prem Upadhyay

प्रेम उपाध्याय न्यूज प्लस लाइव में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे मार्च 2026 से संगठन की डिजिटल विंग के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रणनीति व निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, प्रेम ने लाइव इंडिया, 4 रियल न्यूज और फोकस टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने क्राइम, बिजनेस, डिफेंस, राजनीति और मनोरंजन जैसे विविध बीट्स पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और खबरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों की गहन जांच व तथ्यों के सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

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