“कोई CM ऐसा करेगा, सोचा नहीं था”: I-PAC रेड पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, ममता के दखल को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

I-PAC Row: I-PAC रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया में इस तरह का दखल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस ने कहा कि “कोई मुख्यमंत्री ऐसा करेगा, यह किसी ने सोचा नहीं था।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राज्य और केंद्र के टकराव का नहीं है, बल्कि जांच की स्वतंत्रता और उसकी प्रक्रिया में बाधा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।

ED का आरोप: छापेमारी के दौरान दखल और दस्तावेज ले जाने का दावा

प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं।

ED का कहना है कि इस दौरान जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई और कथित तौर पर कुछ दस्तावेज भी लिए गए, जिससे अधिकारियों के काम में बाधा उत्पन्न हुई। एजेंसी ने इसे जांच में सीधा हस्तक्षेप बताते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।

ममता बनर्जी की ओर से क्या कहा गया?

मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है। उनके अनुसार:

  • ED केवल एक जांच एजेंसी है, जिसे कानून के दायरे में काम करना होता है।

  • किसी अधिकारी को अलग से “मौलिक अधिकार” का दावा नहीं किया जा सकता।

  • एजेंसी खुद को “जनता का रक्षक” बताकर विशेष अधिकार नहीं ले सकती।

  • यह मामला अधिकार क्षेत्र का नहीं बल्कि कार्यप्रणाली का है।

सुप्रीम कोर्ट की 4 अहम टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं, जो इस मामले को और गंभीर बनाती हैं:

  • यह मामला किसी एक व्यक्ति का है, इसे लोकतंत्र पर संकट के रूप में नहीं देखा जा सकता।

  • संविधान बनाते समय किसी ने कल्पना नहीं की थी कि कोई मुख्यमंत्री जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंच जाएगा।

  • सिर्फ कानूनी तर्क नहीं, जमीनी हकीकत को भी समझना जरूरी है।

  • संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है, हर स्थिति में नए दृष्टिकोण की जरूरत होती है।

I-PAC और राजनीतिक रणनीति पर असर

इस पूरे विवाद के बीच I-PAC (Indian Political Action Committee) का कोलकाता स्थित दफ्तर 20 अप्रैल से बंद बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1300 कर्मचारियों को काम पर न आने का संदेश भेजा गया है।

यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के पहले चरण की वोटिंग नजदीक है। I-PAC लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति, डेटा मैनेजमेंट और कैंपेनिंग का अहम हिस्सा रहा है।

करोड़ों के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा मामला

पूरा मामला कथित तौर पर ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा बताया जा रहा है, जो कोयला चोरी घोटाले से संबंधित है। आरोप है कि इस घोटाले से जुड़े धन का लगभग ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचा।

CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी, जबकि ED ने 28 नवंबर 2020 से जांच शुरू की। इसके बाद 8 जनवरी को कोलकाता में छापेमारी की गई।

राजनीतिक हलचल तेज

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ ED इसे जांच में बाधा का मामला बता रही है, वहीं ममता बनर्जी पक्ष इसे राजनीतिक और कानूनी अधिकारों की व्याख्या से जोड़कर देख रहा है।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा और भविष्य तय कर सकती है।

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Varun Srivastava

वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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