बंगाल में पहली बार BJP सरकार, असम में NDA की हैट्रिक; तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय का जलवा, केरल में कांग्रेस की वापसी

Assembly Election Results 2026: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की सियासत में बड़ा बदलाव कर दिया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सत्ता परिवर्तन हुआ है, जबकि असम और पुडुचेरी में NDA ने अपनी पकड़ बरकरार रखी है। सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC को हराकर BJP पहली बार सत्ता में आई है। यह जीत न केवल सीटों के लिहाज से बड़ी है, बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर भी बेहद अहम मानी जा रही है।

बंगाल: 3 सीटों से 200+ तक, BJP का ऐतिहासिक उछाल

पश्चिम बंगाल में BJP ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। महज एक दशक पहले 3 सीटों पर सिमटी पार्टी का यह प्रदर्शन अभूतपूर्व है। TMC 81 सीटों पर सिमट गई और पार्टी के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। खुद ममता बनर्जी भी चुनाव हार गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

1972 के बाद यह पहली बार है जब पश्चिम बंगाल में ऐसी पार्टी की सरकार बनने जा रही है, जिसकी केंद्र में भी सत्ता है। तब इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में थी।

CM चेहरा कौन? सस्पेंस बरकरार

ऐतिहासिक जीत के बावजूद BJP के सामने मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। पार्टी ने बिना किसी घोषित CM फेस के चुनाव लड़ा था, इसलिए अब नेतृत्व चयन को लेकर मंथन तेज है। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य भी रेस में हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी किसी महिला चेहरे पर भी दांव खेल सकती है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधा जा सके।

ग्राउंड पर BJP का दबदबा

इस चुनाव में BJP ने बंगाल के लगभग हर हिस्से में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पारंपरिक रूप से TMC का गढ़ माने जाने वाले दक्षिण बंगाल में पार्टी ने 33 सीटें जीतकर बड़ा सेंध लगाया। नॉर्थ 24 परगना जैसे अहम जिले में 18 सीटें जीतना BJP के लिए बड़ी उपलब्धि रही। पूर्वी मेदिनीपुर (16 सीटें) और हुगली (15 सीटें) में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। इसके अलावा जंगलमहल क्षेत्र जिसमें पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम मेदिनीपुर शामिल है में BJP ने भारी बढ़त बनाकर यह साफ कर दिया कि उसने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी गहरी पैठ बना ली है।

रणनीति: ‘पन्ना प्रमुख’ से बूथ तक पकड़

BJP की इस जीत के पीछे मजबूत संगठन और माइक्रो-मैनेजमेंट की रणनीति अहम रही। अमित शाह ने खुद करीब 15 दिन बंगाल में रहकर चुनावी अभियान की कमान संभाली।
पार्टी ने 44,000 से ज्यादा बूथों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ और ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग रणनीति बनाई। ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल के तहत हर कार्यकर्ता को 30–60 वोटर्स की जिम्मेदारी दी गई, जिससे सीधा संपर्क और वोटर मोबिलाइजेशन मजबूत हुआ। इस रणनीति का लक्ष्य साफ था। हर समर्थक मतदाता को मतदान केंद्र तक पहुंचाना, और इसमें पार्टी काफी हद तक सफल भी रही।

वोटर लिस्ट विवाद और असर

चुनाव के दौरान SIR (Special Intensive Revision) के तहत करीब 91 लाख वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जो बड़ा मुद्दा बना। आंकड़ों के अनुसार, हटाए गए नामों में मुस्लिम वोटर्स का अनुपात अपेक्षाकृत ज्यादा रहा। इसका असर उन सीटों पर पड़ा, जहां ये वोट निर्णायक भूमिका निभाते थे। कई जगह चुनावी समीकरण बदले और इसका फायदा BJP को मिला। हालांकि, विपक्ष ने इसे लेकर चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

तमिलनाडु: ‘थलापति’ विजय की एंट्री

तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां फिल्म स्टार से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में DMK या AIADMK के बिना सरकार बनने जा रही है, जो एक ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है। वहीं DMK प्रमुख एम के स्टालिन को हार का सामना करना पड़ा।

असम में NDA की हैट्रिक

असम में NDA ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में BJP ने विकास और सुशासन के मुद्दों पर चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की है। यह जीत पूर्वोत्तर में पार्टी की स्थायी मजबूती का संकेत देती है।

केरल में कांग्रेस की वापसी

केरल में इस बार कांग्रेस ने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट को हराकर सत्ता में वापसी की है। लंबे समय से LDF और UDF के बीच सत्ता बदलती रही है, लेकिन इस बार कांग्रेस की जीत ने लेफ्ट को पूरी तरह सत्ता से बाहर कर दिया। इसके साथ ही देश में अब किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बची है, जो राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

फिलहाल इन चुनाव नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की राजनीति नए दौर में प्रवेश कर रही है। बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, तमिलनाडु में नए नेतृत्व का उदय और केरल में कांग्रेस की वापसी। ये सभी संकेत हैं कि आने वाले समय में सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। अब सबसे ज्यादा नजरें पश्चिम बंगाल पर हैं, जहां BJP का मुख्यमंत्री चेहरा राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

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