डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: ईरान पर सख्त बयान के बाद बेटे-बहू संग बीजिंग पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति, जानिए इस यात्रा के बड़े मायने

Donald Trump China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को 8 साल बाद चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर कहा था कि अमेरिका को चीन की किसी मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन अब वही ट्रंप अपने बेटे और बहू के साथ चीन की अहम यात्रा पर पहुंचे हैं। इस दौरे को अमेरिका-चीन रिश्तों और वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया गया। चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग और वरिष्ठ राजनयिक झी फेंग ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। एयर फोर्स वन से उतरते समय करीब 300 स्कूली बच्चे अमेरिका और चीन के झंडे लहराते नजर आए। बच्चों ने मंदारिन भाषा में “वेलकम” के नारे भी लगाए।

ट्रंप के साथ उनके बेटे एरिक ट्रंप और बहू लारा ट्रंप भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि ट्रंप परिवार की मौजूदगी इस दौरे को राजनीतिक के साथ-साथ प्रतीकात्मक रूप से भी खास बना रही है।

शी जिनपिंग से कई दौर की बातचीत होगी

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति शी जिपिंग और ट्रंप के बीच गुरुवार और शुक्रवार को कई दौर की बैठकें होंगी। इन बैठकों में व्यापार, ताइवान, रेयर अर्थ मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और ईरान युद्ध जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

ट्रंप 15 मई तक चीन में रहेंगे। यह उनका 2017 के बाद पहला चीन दौरा है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भी शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया था।

बड़े अमेरिकी कारोबारी भी पहुंचे चीन

इस दौरे में अमेरिका के कई बड़े कारोबारी भी शामिल हुए हैं। इनमेंएलन मस्क, टिम कुक और बोइंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं हैं।

सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा के दौरान बोइंग विमानों की बड़ी डील पर बातचीत हो सकती है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन 500 बोइंग 737 MAX, 100 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर और कई 777X वाइडबॉडी विमान खरीद सकता है। अगर यह समझौता होता है तो इसे विमानन इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में गिना जाएगा।

ईरान युद्ध पर ट्रंप का बयान

बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका को चीन की मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा था कि अमेरिका किसी भी हाल में यह लड़ाई जीत जाएगा।

पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।

मार्को रुबियो को लेकर चीन ने निकाला नया रास्ता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी ट्रंप के साथ चीन पहुंचे हैं। दिलचस्प बात यह है कि चीन पहले ही मार्को रुबियो पर प्रतिबंध लगा चुका था।

रुबियो ने अमेरिकी सांसद रहते हुए उइगर मुसलमानों और हांगकांग के मुद्दों पर चीन की आलोचना की थी। इसके बाद चीन ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें चीन में प्रवेश पर रोक भी शामिल थी।

अब चीन ने उनके नाम को चीनी भाषा में लिखने का तरीका बदल दिया है। माना जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि पुराने नाम पर लगा प्रतिबंध तकनीकी रूप से नए नाम पर लागू न हो और उनकी चीन यात्रा संभव हो सके।

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ट्रंप के सम्मान में होगा स्टेट डिनर

व्हाइट हाउस के मुताबिक राष्ट्रपति शी जिंनपिंग ट्रंप के सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन करेंगे। चीन में इस तरह का आयोजन बेहद बड़ा कूटनीतिक सम्मान माना जाता है।

यह कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किया जाता है, जहां विदेशी नेताओं का औपचारिक स्वागत किया जाता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस आयोजन के जरिए अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत दिखाने की कोशिश करेगा।

ट्रंप-जिनपिंग वार्ता में इन 4 मुद्दों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

1. ट्रेड वॉर और टैरिफ

अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव लंबे समय से जारी है। ट्रंप पहले चीनी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते और टैरिफ विवाद पर चर्चा अहम मानी जा रही है।

2. ताइवान और हथियार सौदा

ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रंप 11 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार पैकेज पर भी चर्चा कर सकते हैं। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री का विरोध करता रहा है।

3. रेयर अर्थ मिनरल्स और AI

रेयर अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहन, चिप निर्माण और रक्षा उद्योग के लिए बेहद जरूरी हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है, जबकि अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। AI और सेमीकंडक्टर तकनीक को लेकर भी दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

4. कृषि और सोयाबीन व्यापार

चीन अमेरिकी किसानों के लिए बड़ा बाजार माना जाता है। ट्रेड वॉर के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद कम कर दी थी। अब ट्रंप प्रशासन कृषि निर्यात बढ़ाने की दिशा में कोशिश कर सकता है।

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Prem Upadhyay

प्रेम उपाध्याय न्यूज प्लस लाइव में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे मार्च 2026 से संगठन की डिजिटल विंग के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रणनीति व निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, प्रेम ने लाइव इंडिया, 4 रियल न्यूज और फोकस टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने क्राइम, बिजनेस, डिफेंस, राजनीति और मनोरंजन जैसे विविध बीट्स पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और खबरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों की गहन जांच व तथ्यों के सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

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