ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज स्ट्रेट: लेबनान में 16 मौतों के बाद बढ़ा तनाव, नेतन्याहू बोले- सैन्य अभियान जारी रहेगा

Iran closes Hormuz Strait again: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद कर दिया है। ईरानी जॉइंट मिलिट्री कमांड ने सरकारी टीवी पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि लेबनान में जारी इजराइली हमलों और युद्धविराम के उल्लंघन के बाद यह फैसला लिया गया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब 17 जून की रात अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए खुला रखने और लेबनान में इजराइली हमले रोकने जैसी अहम शर्तें शामिल थीं। हालांकि समझौते के बाद भी इजराइल ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी।

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर 19 जून की रात इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) का ऐलान किया गया, लेकिन यह ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर लागू होने के महज 8 घंटे बाद ही इजराइली सेना ने ड्रोन और तोपों से लेबनान के नबातियेह इलाके पर हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान जारी रहेगा और देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ईरान ने जहाजों को दी सख्त चेतावनी

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने रेडियो संदेश जारी कर सभी व्यापारिक और सैन्य जहाजों को चेतावनी दी है कि वे होर्मुज स्ट्रेट के पास न आएं। ईरान ने दावा किया है कि समुद्री मार्ग बंद कर दिया गया है और आदेश का उल्लंघन करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके साथ ही सभी जहाजों को वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। इस कदम ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

जहाजों की आवाजाही को लेकर अलग-अलग दावे

समुद्री विश्लेषण फर्म विंडवर्ड के अनुसार, ईरान की घोषणा से पहले शनिवार को कुल 22 जहाज इस मार्ग से होकर गुजरे थे। इनमें से 6 जहाज ओमान के दक्षिणी समुद्री मार्ग से निकले, जबकि 16 जहाज उत्तरी मार्ग से गुजरे, जो ईरान के प्रभाव क्षेत्र में आता है।

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अलग आंकड़े जारी किए हैं। CENTCOM का दावा है कि शनिवार को कुल 55 वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों आंकड़ों में अंतर की एक वजह यह भी हो सकती है कि कई जहाज अपनी ट्रैकिंग प्रणाली बंद करके चल रहे थे, जिससे निजी निगरानी एजेंसियों के लिए उनकी सटीक संख्या का पता लगाना मुश्किल हो गया।

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ईरान बोला- अमेरिका इजराइल पर लगाम लगाने में विफल

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने कहा कि ईरान ने समझौते की सभी शर्तों का पालन किया है, लेकिन अमेरिका इजराइल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करने में नाकाम रहा है।

उन्होंने कहा कि लेबनान में युद्धविराम का उल्लंघन पूरे समझौते को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान अमेरिका के साथ आगे की बातचीत के लिए अपना एक प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड भेज रहा है। ईरान का कहना है कि वह समझौते की शर्तों को पूरी तरह लागू करवाने की मांग करेगा और यदि दूसरी तरफ से समझौते का उल्लंघन हुआ तो वह भी उसी तरह जवाबी कदम उठाएगा।

अमेरिका का दावा- समुद्री मार्ग सुरक्षित है

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। CENTCOM के मुताबिक, 20 जून को 55 कॉमर्शियल जहाज इस मार्ग से होकर गुजरे, जिनके जरिए 1.7 करोड़ से अधिक बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया गया। अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि वह पूरे क्षेत्र में सतर्क और सक्रिय है तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद हो चुका है। उन्होंने कहा कि तेल टैंकरों की आवाजाही जारी है और जल्द ही स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच नई वार्ता शुरू होने की उम्मीद है।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यह लंबे समय तक बंद रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, शिपिंग लागत बढ़ सकती है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।

फिलहाल पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान, इजराइल और लेबनान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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