Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए छह भारतीय जवानों के नाम सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि शहीदों की जानकारी एक साल तक सार्वजनिक नहीं की गई और उन्हें समय पर वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि शहीदों को समय-समय पर सार्वजनिक श्रद्धांजलि और सम्मान दिया गया था तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, “दो ही संभावनाएं हैं। या तो रक्षा मंत्री को उस समय छह जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी, या फिर उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। सरकार ने इन जवानों की शहादत एक साल तक सार्वजनिक नहीं की। उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।”
खेड़ा ने अपने पोस्ट में दावा किया कि संसद में राजनाथ सिंह ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक को कोई नुकसान नहीं हुआ, जबकि अब छह जवानों के शहीद होने की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है।
सिर्फ़ दो ही संभावनाएँ हैं।
या तो रक्षा मंत्री @rajnathsingh ने जब संसद को संबोधित किया तो उनकों यह जानकारी ही नहीं थी कि छह सैनिक शहीद हो चुके थे। यदि ऐसा है, तो यह उस मंत्री पर गंभीर प्रश्नचिह्न है, जिसे उसी मंत्रालय के मामलों की जानकारी नहीं है जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं।… pic.twitter.com/5JdSjaqf0B
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) June 27, 2026
रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को बताया गलत
रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह गलत दावा किया जा रहा है कि छह शहीदों को पहली बार अब सार्वजनिक सम्मान मिला है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत है।
मंत्रालय के अनुसार, 11 मई 2025 को तत्कालीन सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन छह जवानों को श्रद्धांजलि दी थी। इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्हें वीरता पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई। भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शहीदों को तत्काल श्रद्धांजलि दी गई थी।
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रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 8 अक्टूबर 2025 को वायुसेना प्रमुख ने एक शहीद सार्जेंट के परिजनों को सम्मानित किया था, जबकि 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीदों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया था। मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है, जिसका पालन किया गया है। इसलिए यह कहना कि नाम दर्ज करने में देरी हुई या शहीदों को पहली बार सम्मान मिला, सही नहीं है।
राजनाथ सिंह के बयान पर भी दी सफाई
रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, राजनाथ सिंह का बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने के दावों का खंडन करने के संदर्भ में था, न कि शहीद जवानों के अस्तित्व से इनकार करने के लिए।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर
गौरतलब है कि 6 मई 2025 को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। सरकार के अनुसार इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी। भारत ने इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस और आतंकी ठिकानों को भी निशाना बनाया था।
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