Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में कम से कम 2 करोड़ रुपए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने के लिए दो हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है। कोर्ट ने यह रकम सुरक्षा राशि के तौर पर जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
CJI बोले- ‘कोर्ट में भी एक्टिंग कर रहे हैं’
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने राजपाल यादव के पुराने आचरण को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “उनके पुराने रवैये को देखते हुए… कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं, कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।”
कोर्ट ने हालांकि राजपाल यादव को अंतिम दो हफ्ते की मोहलत दी। उनके वकील ने भरोसा दिलाया कि इस अवधि में 2 करोड़ रुपए रजिस्ट्री में जमा कराए जाएंगे और बाकी बकाया रकम के लिए सुरक्षा दी जाएगी।
राजपाल यादव के वकील बोले- कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे
अभिनेता राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत पर कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने आज राजपाल यादव को कुछ राहत दी है और दो हफ्ते का समय दिया है। हमें रजिस्ट्री में सुरक्षा राशि के तौर पर 2 करोड़ रुपए जमा करने हैं। हम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे।”
उन्होंने कहा कि उनकी ओर से मामले की मेरिट के आधार पर सुनवाई का अनुरोध किया गया है। वकील के मुताबिक, पहले 5 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश था, लेकिन कोर्ट ने नरमी बरतते हुए इसे घटाकर 2 करोड़ रुपए कर दिया है।
भास्कर उपाध्याय ने कहा कि आदेश का पालन किया जाएगा, ताकि मामले की मेरिट पर सुनवाई हो सके और सच्चाई सामने लाई जा सके।
VIDEO | Delhi: Advocate Bhaskar Upadhyay, counsel for actor Rajpal Yadav, on the relief granted by the Supreme Court, says, “The Supreme Court has given Rajpal some relief today and granted two weeks’ time. We have to deposit Rs 2 crore with the Registry as security. We will… pic.twitter.com/AgBQREhnd2
— Press Trust of India (@PTI_News) September 15, 2026
2010 का है विवाद, करीब 5 करोड़ रुपए का लिया था लोन
यह विवाद वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था।
इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। यह कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म अपनी लागत भी पूरी नहीं कर पाई। इसके बाद राजपाल यादव के लिए लोन चुकाना मुश्किल हो गया।
ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने के साथ बकाया रकम बढ़ती गई।
2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में किसी तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था।
इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं।
2013 में हुआ था समझौता
राजपाल यादव की याचिका के मुताबिक, 21 अप्रैल 2013 को दोनों पक्षों के बीच सहमति समझौता हुआ था। इसके तहत 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति बनी थी। इसमें से 40 लाख रुपए RTGS के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे।
समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे।
यादव की याचिका में कहा गया कि समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाया।
Rajpal Yadav Cheque Bounce case | The Supreme Court grants last opportunity to Bollywood actor Rajpal Yadav to deposit at least Rs 2 crores to the Supreme Court Registry within two weeks time as part of his ongoing dispute with a private complainant, the owner of Murali… pic.twitter.com/bLmDGKKhR6
— ANI (@ANI) September 15, 2026
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राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?
सुप्रीम कोर्ट में राजपाल यादव की ओर से दलील दी गई कि बाद में हुए समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है। नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है।
2018 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया
ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में राजपाल यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था।
शुरुआत में राजपाल यादव को हर मामले में 6 महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।
बाद में सजा कम कर दी गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में 3 महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया गया।
2024 में सेशंस कोर्ट और 2026 में हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी
सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए के जुर्माने को कायम रखा।
इसके बाद राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। 10 जुलाई 2026 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
5 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राजपाल यादव को गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। हालांकि, अदालत ने उन्हें दो हफ्ते के भीतर 2 करोड़ रुपए जमा करने की आखिरी मोहलत दी है।
साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।





