Pakistan Link Exposed: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार सीधे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और कट्टरपंथी आतंकी संगठनों से जुड़े पाए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह देश में आगजनी, विस्फोट और दहशत फैलाने की साजिश रच रहा था, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन
ATS की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे। ये हैंडलर्स उन्हें निर्देश देते थे कि किन-किन संवेदनशील स्थानों की रेकी करनी है और किन ठिकानों को निशाना बनाना है।
इतना ही नहीं, आरोपियों के संपर्क अफगानिस्तान के कुछ संदिग्ध नंबरों और कट्टरपंथी नेटवर्क से भी पाए गए हैं।
आतंकी संगठनों की विचारधारा से जुड़े थे आरोपी
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों को “गजवा-ए-हिंद”, “कश्मीर मुजाहिद्दीन” और अंतरराष्ट्रीय आतंकी चेहरों के नामों के जरिए भड़काया जा रहा था। पाकिस्तानी हैंडलर्स इन्हें धार्मिक उन्माद फैलाकर देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए उकसाते थे।
इनका मकसद भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देकर भय का माहौल बनाना और आर्थिक व सामाजिक नुकसान पहुंचाना था।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- साकिब उर्फ डेविल (25) – अगवानपुर, मेरठ
- अरबाब (20) – मेरठ
- विकास पहलावत उर्फ रौनक (27) – गौतम बुद्ध नगर
- लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू (19)
ATS के अनुसार, ये सभी आरोपी पैसों के लालच और कट्टरपंथी प्रभाव में आकर इस नेटवर्क का हिस्सा बने थे।
रेलवे और संवेदनशील ठिकानों पर हमले की साजिश
गिरोह का मुख्य टारगेट रेलवे सिग्नल बॉक्स, गैस सिलेंडर से भरे ट्रक और अन्य सरकारी व सार्वजनिक संपत्तियां थीं। आरोपियों ने लखनऊ, गाजियाबाद और अलीगढ़ जैसे शहरों में कई स्थानों की रेकी की थी।
कुछ जगहों पर छोटी आगजनी की घटनाएं कर उनके वीडियो पाकिस्तान भेजे गए, जिससे हैंडलर्स को उनकी “क्षमता” दिखाई जा सके।
QR कोड से मिलती थी फंडिंग
ATS के मुताबिक, आरोपियों को उनके काम के बदले QR कोड और डिजिटल माध्यम से पैसे भेजे जाते थे। गूगल लोकेशन के जरिए टारगेट तय किए जाते थे और फिर उसी के अनुसार हमले की योजना बनाई जाती थी।
लखनऊ में बड़ी कार्रवाई, हमले से पहले गिरफ्तारी
2 अप्रैल 2026 को आरोपी लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। ATS ने सटीक सूचना के आधार पर छापेमारी कर चारों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
बरामदगी में ज्वलनशील पदार्थ से भरा कैन, 7 मोबाइल फोन, 24 पर्चे और अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज
इस मामले में ATS थाना लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता 2023 और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की जांच और कार्रवाई जारी है।
बड़ी साजिश नाकाम, नेटवर्क की तलाश जारी
ATS की इस कार्रवाई से एक बड़े आतंकी हमले को टाल दिया गया है। फिलहाल एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंडिंग चैनल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही हैं।
यह ऑपरेशन सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।






