Women’s Reservation Bill: देश में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर समर्थन मांगा है। अपने पत्र में पीएम ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की बात लंबे समय से होती रही है, लेकिन अब इसे लागू करने का सही समय आ गया है। उन्होंने इस पहल को लोकतंत्र को और मजबूत करने वाला कदम बताया।
2029 चुनाव से लागू करने की तैयारी
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट संकेत दिया कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए। उनका मानना है कि इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्माण में भी उनका प्रभाव मजबूत होगा। सरकार इसे एक ऐतिहासिक सामाजिक सुधार के रूप में पेश कर रही है।
खड़गे का हमला: ‘चुनावी फायदा लेने की कोशिश’
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे को चुनावी फायदे के लिए जल्दबाजी में लागू करना चाहती है।
खड़गे ने मांग की कि इस विषय पर पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, ताकि सभी पक्षों की राय लेकर व्यापक सहमति बनाई जा सके।
कैबिनेट से मंजूरी, सीटों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल के संशोधित ड्राफ्ट को मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
यह बदलाव भारतीय राजनीति की संरचना में बड़ा परिवर्तन ला सकता है और महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दे सकता है।
16 अप्रैल से विशेष सत्र, संसद में होगी चर्चा
सरकार ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में महिला आरक्षण बिल को पेश कर उस पर चर्चा और पारित कराने की तैयारी की जा रही है।
संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी साल होने वाले आम चुनाव में पहली बार इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
परिसीमन और जनगणना बना अहम मुद्दा
महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन (सीटों का पुनर्निर्धारण) जरूरी होगा। इसके लिए सरकार अलग से कानून में संशोधन लाने की योजना बना रही है।
संभावना है कि नई सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए, न कि 2027 की संभावित जनगणना के आधार पर। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में भी लागू किया जाएगा।
राजनीतिक टकराव तेज, नजरें विशेष सत्र पर
महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति के तौर पर देख रहा है।
अब सभी की नजरें 16 अप्रैल से शुरू होने वाले विशेष सत्र पर हैं, जहां यह तय होगा कि यह बिल सर्वसम्मति से पास होता है या फिर सियासी टकराव और गहरा होता है।
महिला आरक्षण बिल वर्षों से लंबित एक बड़ा मुद्दा रहा है। अब जब सरकार इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, तो राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा भारतीय राजनीति का केंद्र बिंदु बना रहेगा।







