Samrat Choudhary Oath Ceremony: बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) ने बुधवार (15 अप्रैल 2026) को लोकभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता संभाल ली। शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने अपने विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि बिहार में अब “मोदी-नीतीश मॉडल” के आधार पर विकास की नई दिशा तय की जाएगी।
मीडिया से बातचीत में सम्राट चौधरी ने कहा कि वह आज से ही काम शुरू कर रहे हैं और उनकी प्राथमिकता बिहार को तेज गति से विकास की राह पर आगे बढ़ाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर तालमेल के जरिए योजनाओं को जमीन पर उतारा जाएगा।
‘मोदी-नीतीश मॉडल’ पर जोर
सम्राट चौधरी के बयान में “मोदी-नीतीश मॉडल” की बात सबसे अहम रही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नीतियों और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासन अनुभव को मिलाकर बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा।
उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि नई सरकार केंद्र की योजनाओं को तेजी से लागू करने के साथ-साथ नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के प्रशासनिक मॉडल को भी आगे बढ़ाएगी।
कार्यकर्ताओं और जनता का आभार
शपथ के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पार्टी कार्यालय भी पहुंचे, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बीजेपी की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और उन्हीं के बल पर पार्टी इस मुकाम तक पहुंची है।
उन्होंने कहा,
“मैं सभी कार्यकर्ताओं का अभिवादन करने और उनका धन्यवाद देने आया हूं। बिहार के विकास के लिए हम सब मिलकर काम करेंगे।”
नेताओं की प्रतिक्रिया
नई सरकार के गठन के बाद एनडीए और बीजेपी नेताओं ने सम्राट चौधरी को बधाई दी और उनके नेतृत्व में बिहार के विकास को लेकर भरोसा जताया।
बीजेपी नेता राम कृपाल यादव ने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार तेजी से विकास करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा नीतीश कुमार का सपना साकार होगा।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह एनडीए सरकार है और सम्राट चौधरी, नीतीश कुमार के काम को आगे बढ़ाएंगे।
दीपक प्रकाश ने भी नई सरकार को बधाई देते हुए कहा कि बिहार के विकास के लक्ष्य अब और तेजी से हासिल किए जाएंगे।
क्या है राजनीतिक संदेश?
सम्राट चौधरी का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि आने वाले समय की रणनीति का संकेत भी है। “मोदी-नीतीश मॉडल” के जरिए वह यह संदेश देना चाहते हैं कि बिहार में स्थिरता, विकास और केंद्र-राज्य समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें विकास और सुशासन को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा।
बता दें कि सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद संभालते ही अपने इरादे साफ कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि “मोदी-नीतीश मॉडल” के जरिए वह बिहार को किस तरह नई दिशा और गति दे पाते हैं।








