Hormuz Strait News: ईरान के बड़े ऐलान के बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत की लहर दौड़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट को सीजफायर के दौरान पूरी तरह खोलने के फैसले ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से नीचे ला दिया। यह वही अहम समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है। इसके खुलने से सप्लाई चेन में सुधार की उम्मीद बढ़ी और बाजारों में तुरंत सकारात्मक असर देखने को मिला।
120 डॉलर से लुढ़ककर 90 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट
हाल के तनाव के दौरान कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया था। लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी गिरकर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह गिरावट सप्लाई की बहाली और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने की उम्मीद से जुड़ी है, जिससे बाजार को बड़ी राहत मिली है।
शेयर बाजारों में जोरदार तेजी
तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर दुनियाभर के शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में S&P 500 और Nasdaq Composite दोनों इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद भी मजबूती के साथ आगे बढ़ते दिखे। यूरोप में फ्रैंकफर्ट और पेरिस के बाजारों में करीब 2% की तेजी दर्ज की गई।
हालांकि एशियाई बाजारों का रुख मिलाजुला रहा। TAIEX सहित कई इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि टोक्यो, हांगकांग और शंघाई के बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय स्तर पर निवेशकों में अभी भी सतर्कता बनी हुई है।
सीजफायर से उम्मीद, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच सामने आया है। सीजफायर की खबर ने शांति की उम्मीद जरूर बढ़ाई है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरानी पोर्ट्स पर अमेरिकी ब्लॉकेड अभी भी जारी है, जिससे हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
वहीं यूरोप में इमैनुएल मैक्रों और कीर स्टार्मर ने सहयोगी देशों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में जंग खत्म होने के बाद होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर फ्री ट्रेड सुनिश्चित करने और मल्टीनेशनल फोर्स तैनात करने जैसे विकल्पों पर चर्चा की जा रही है।
क्या आगे और सस्ता होगा तेल?
फिलहाल होर्मुज के खुले रहने से सप्लाई का संकट काफी हद तक टल गया है और बाजार में राहत दिख रही है। अगर सीजफायर कायम रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट संभव है।
हालांकि जियोपॉलिटिकल स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ऐसे में अगर तनाव फिर बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में दोबारा उछाल भी आ सकता है। यानी फिलहाल राहत जरूर है, लेकिन अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।






