Supreme Court: देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए व्यापक रोड सेफ्टी गाइडलाइंस जारी की हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे किसी भी हालत में “खतरे का गलियारा” नहीं बन सकते और इन पर सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत मजबूत करना जरूरी है।
यह आदेश जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने दिया है। कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
हाईवे पर हादसों के आंकड़े बने चिंता का कारण
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बताया कि नेशनल हाईवे देश की कुल सड़क लंबाई का सिर्फ 2% हैं, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली करीब 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं।
यह मामला राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2025 में हुए भीषण सड़क हादसों (34 मौतें) के बाद सामने आया था।
हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग पर पूरी रोक
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी नेशनल हाईवे के कैरिजवे या पक्के शोल्डर पर भारी या कमर्शियल वाहन खड़े नहीं किए जा सकेंगे। केवल अधिकृत ले-बाय, पार्किंग जोन या तय की गई सुविधाओं पर ही वाहनों को रोकने की अनुमति होगी।
ATMS से होगी रियल-टाइम निगरानी
नए नियमों के पालन के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लागू किया जाएगा। इसके तहत:
- ट्रैफिक उल्लंघन पर पुलिस को रियल-टाइम अलर्ट मिलेगा
- GPS टाइमस्टैम्प के साथ फोटो सबूत जुटाए जाएंगे
- नियम तोड़ने पर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी होगा
60 दिन में SOP लागू करना अनिवार्य
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पुलिस और परिवहन विभाग को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। जिला कलेक्टरों को 60 दिनों के भीतर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर उसे लागू करने का आदेश दिया गया है।
हाईवे किनारे अवैध ढाबों पर सख्त कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नेशनल हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ (ROW) क्षेत्र में किसी भी नए ढाबे, होटल या कमर्शियल निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही सभी अवैध निर्माणों की पहचान कर उन्हें 60 दिनों के भीतर हटाने या गिराने का आदेश दिया गया है।
बिना मंजूरी नहीं मिलेगा लाइसेंस
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईवे सुरक्षा जोन में कोई भी विभाग या स्थानीय निकाय बिना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण या PWD की मंजूरी के न तो नया लाइसेंस जारी करेगा और न ही मौजूदा लाइसेंस का नवीनीकरण करेगा। सभी पुराने लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर समीक्षा अनिवार्य होगी।
हर जिले में बनेगी रोड सेफ्टी टास्क फोर्स
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन जिलों से नेशनल हाईवे गुजरते हैं, वहां 15 दिनों के भीतर रोड सेफ्टी टास्क फोर्स बनाई जाए। इसमें प्रशासन, पुलिस, NHAI और PWD के अधिकारी शामिल होंगे, जो हाईवे सुरक्षा और नियमों के पालन की निगरानी करेंगे।
कोर्ट का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि हाईवे और एक्सप्रेसवे तेज और सुरक्षित यात्रा के लिए बनाए गए हैं, न कि लापरवाही और अव्यवस्था के कारण जानलेवा रास्ते बनने के लिए।
इन सख्त निर्देशों के लागू होने के बाद देशभर में सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और हादसों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।







