सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संविधान सर्वोपरि, निजी धार्मिक मान्यताओं से ऊपर रखकर फैसला जरूरी

Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी में कहा है कि आस्था से जुड़े मामलों में निर्णय लेते समय संविधान को व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं से ऊपर रखा जाना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि जब भी मौलिक अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों का प्रश्न हो, तो न्यायिक प्रक्रिया केवल धार्मिक परंपराओं के आधार पर सीमित नहीं हो सकती।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में “मन की स्वतंत्रता” और संविधान द्वारा निर्धारित ढांचे के अनुसार ही फैसला होना चाहिए। अदालत में बहस का केंद्र यही रहा कि क्या धार्मिक मामलों में न्यायपालिका का हस्तक्षेप उचित है या नहीं।

पीठ ने संकेत दिया कि जब मामला संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हो, तो केवल “धर्म की दुहाई” देकर उसे न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं किया जा सकता।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने दलील दी कि अंतरात्मा का अधिकार व्यापक है और यह किसी भी व्यवस्था या धार्मिक ढांचे पर सवाल उठाने की स्वतंत्रता देता है। अदालत अब अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन की व्याख्या कर रही है।

इससे पहले 9 जजों की बेंच ने 15 अप्रैल की सुनवाई में कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना बेहद संवेदनशील और कठिन विषय है। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक परंपराओं को पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सकता।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं (10 से 50 वर्ष आयु वर्ग) के प्रवेश को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में इस पर रोक लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में हटाया था। इसके बाद फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब सुनवाई चल रही है।

मंदिर प्रशासन अभी भी महिलाओं के प्रवेश के विरोध में है। वहीं केंद्र सरकार ने भी सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों के प्रवेश पर भी परंपरागत प्रतिबंध हैं, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

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  • Varun Srivastava

    वरुण श्रीवास्तव वर्तमान में न्यूज प्लस लाइव में कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर डिजिटल टीम के सक्रिय सदस्य हैं। उनके पास डिजिटल, वेब और ब्रॉडकास्ट पत्रकारिता में 13 वर्षों का अनुभव है। न्यूज प्लस लाइव से पहले, उन्होंने 4Real News, Network18, Sun Star और लोकतंत्र मीडिया जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए अपनी पत्रकारिता की पहचान बनाई।

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