US-Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के साथ जारी सीजफायर को आगे बढ़ाने का ऐलान कर दिया, जबकि इससे पहले वे लगातार कड़े रुख में नजर आ रहे थे और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहे थे। आखिरी समय में लिया गया यह फैसला बताता है कि पर्दे के पीछे बड़े स्तर पर कूटनीतिक प्रयास हुए।
पाकिस्तान की अपील बनी गेमचेंजर
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) और पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर (Asim Munir) ने सीधे ट्रंप से अपील की कि ईरान को प्रस्ताव रखने का मौका दिया जाए और तब तक किसी भी सैन्य कार्रवाई को रोका जाए। यह अपील सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके साथ बैकचैनल कूटनीति भी सक्रिय रही, जिसने अमेरिका के रुख को नरम करने में अहम भूमिका निभाई।
डेडलाइन से ठीक पहले बदला फैसला
अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर तय समय सीमा तक कोई समझौता नहीं होता, तो ईरान पर हमले किए जा सकते हैं। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले बुधवार की सुबह डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर बढ़ाने की घोषणा कर दी।
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उन्होंने कहा कि अमेरिका तब तक हमला नहीं करेगा जब तक ईरान बातचीत के लिए एक साझा प्रस्ताव लेकर सामने नहीं आता। हमले रुकने के बावजूद ट्रंप ने साफ किया है कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी अभी जारी रहेगी। सीजफायर की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि मुनीर और शहबाज के कहने पर सीजफायर की घोषणा की गई है। ईरान से प्रस्ताव आने तक हमले पर रोक रहेगी।
ट्रंप ने बताए फैसले के कारण
इसके साथ ही ट्रंप ने अपने बयान में दो अहम कारणों का जिक्र भी किया। पहला, ईरान की आंतरिक स्थिति को देखते हुए उसे समय देना जरूरी है, और दूसरा, पाकिस्तान की अपील, जिसमें बातचीत को मौका देने की बात कही गई। इन दोनों कारणों ने मिलकर तत्काल सैन्य कार्रवाई को टालने में भूमिका निभाई।
शहबाज शरीफ ने ट्रंप का जताया आभार
सीजफायर बढ़ाए जाने के बाद शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान की अपील को स्वीकार कर कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ने का मौका दिया है।
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शरीफ ने यह भी भरोसा दिलाया कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए गंभीर प्रयास जारी रखेगा और बातचीत के जरिए समाधान निकालने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
ईरान का सख्त रुख बरकरार
हालांकि ईरान की ओर से इस फैसले पर पूरी तरह भरोसा नहीं जताया गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहमद बाघेर गालिबर (Mohammad Bagher Ghalibaf) के करीबी सूत्रों ने अमेरिकी घोषणा को रणनीतिक कदम बताते हुए संदेह जताया है। ईरान का मानना है कि अमेरिका दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना चाहता है।
क्या टल गया युद्ध?
फिलहाल सीजफायर बढ़ने से युद्ध का खतरा टलता हुआ जरूर दिख रहा है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले ने अस्थायी राहत जरूर दी है, मगर यह स्थायी समाधान नहीं है। अब सब कुछ आने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। अगर कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और ईरान की ओर से ठोस प्रस्ताव सामने आता है, तो तनाव कम होकर किसी समझौते का रास्ता निकल सकता है। लेकिन अगर वार्ता विफल होती है, तो दोनों पक्षों के बीच टकराव फिर तेज हो सकता है और मिडिल ईस्ट एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा नजर आ सकता है।






