Breaking News Nepal: नेपाल में बालेन शाह की सरकार बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकार के गठन के महज 26 दिनों के भीतर ही दो मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ा है। ताजा मामला नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग के इस्तीफे का है, जिन्होंने बुधवार को अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया।
गुरुंग का इस्तीफा उस समय आया है, जब उन पर एक कारोबारी से कथित संबंधों को लेकर विवाद गहराता जा रहा था। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजनेसमैन दीपक भट्टा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच चल रही है और इसी कनेक्शन को लेकर गुरुंग पर सवाल उठ रहे थे।
इससे पहले भी बालेन शाह सरकार को झटका लगा था, जब श्रम मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में पद से हटाया गया था। ऐसे में लगातार दो मंत्रियों का बाहर होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
नेपाल में 5 मार्च को चुनाव हुए थे, 8 मार्च को नतीजे आए और 27 मार्च को बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन सरकार बनते ही जिस तरह से विवाद सामने आ रहे हैं, उसने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
फेसबुक पोस्ट में बताई वजह
गुरुंग ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनके लिए पद से बड़ी नैतिकता है और जनता का विश्वास सर्वोपरि है।
उन्होंने Gen Z आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि देश में पारदर्शिता, जवाबदेही और साफ-सुथरे शासन की मांग को वे गंभीरता से लेते हैं, और उसी भावना के तहत उन्होंने यह फैसला लिया है।
क्या है पूरा विवाद?
द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुदान गुरुंग स्टार माइक्रो इंश्योरेंस कंपनी में शेयरधारक हैं। इसी कंपनी में कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी दीपक भट्टा और अन्य कारोबारी भी जुड़े हुए हैं। कंपनी के शुरुआती शेयर रिकॉर्ड में गुरुंग का नाम 49वें नंबर पर बताया गया है, जिसमें उन्होंने करीब 2.5 मिलियन रुपये का निवेश किया था।
इसके अलावा उन पर अपनी संपत्ति के आधिकारिक ब्यौरे में इस निवेश का जिक्र न करने का भी आरोप लगा। हालांकि गुरुंग ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके सभी निवेश, जो 20 मिलियन रुपये से अधिक हैं, पहले से ही काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की वेबसाइट पर घोषित हैं।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
सरकार के गठन के इतने कम समय में लगातार इस्तीफे यह संकेत दे रहे हैं कि नेपाल की नई सरकार के सामने स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती बनने वाला है। Gen Z आंदोलन और पारदर्शिता की बढ़ती मांग के बीच राजनीतिक दबाव भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।






