यूपी पुलिस की पहल को सुप्रीम झटका, झूठी FIR और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर SC की रोक

SC Stay on False FIR Action: उत्तर प्रदेश के लखनऊ से बड़ी खबर सामने आई है, जहां यूपी पुलिस मुख्यालय ने झूठी एफआईआर दर्ज कराने और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े पहले जारी सर्कुलर को फिलहाल वापस ले लिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों पर रोक लगा दी गई है।

डीजीपी का आदेश

डीजीपी राजीव कृष्ण ने 14 मार्च 2026 को जारी किए गए उस सर्कुलर को निरस्त कर दिया है, जिसमें यह व्यवस्था दी गई थी कि झूठी एफआईआर पाए जाने पर शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ अनिवार्य रूप से कोर्ट में परिवाद दाखिल किया जाएगा। साथ ही, कार्रवाई न करने पर संबंधित विवेचक, थाना प्रभारी और पर्यवेक्षण अधिकारी को भी जिम्मेदार ठहराने का प्रावधान रखा गया था।

सुप्रीम कोर्ट का स्टे

नए सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘उम्मे फरवा बनाम राज्य सरकार’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगाई है। कोर्ट ने अपने 9 फरवरी के आदेश में साफ कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के पैरा 45 से 48 तक की व्यवस्था अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी।

फिलहाल क्या बदला?

इन्हीं निर्देशों के आधार पर पहले जारी सर्कुलर को लागू किया गया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उसे वापस ले लिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिलहाल झूठी एफआईआर और गवाही को लेकर पहले जैसी सख्त प्रक्रिया लागू नहीं होगी और आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के बाद तय की जाएगी।

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Prem Upadhyay

प्रेम उपाध्याय न्यूज प्लस लाइव में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे मार्च 2026 से संगठन की डिजिटल विंग के साथ जुड़े हुए हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट रणनीति व निष्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, प्रेम ने लाइव इंडिया, 4 रियल न्यूज और फोकस टीवी जैसे विभिन्न न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने क्राइम, बिजनेस, डिफेंस, राजनीति और मनोरंजन जैसे विविध बीट्स पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण किया है। वे तथ्य-आधारित पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और खबरों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए स्रोतों की गहन जांच व तथ्यों के सत्यापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

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